Kangra: सत्ता की दहलीज पर महिलाओं का दबदबा, आरक्षण से आगे निकली नारी शक्ति
punjabkesari.in Sunday, May 03, 2026 - 06:57 PM (IST)
पालमपुर (भृगु): हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2020-21 के पंचायत चुनावों ने महिला सशक्तिकरण की एक नई मिसाल पेश की है। राज्य चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के विश्लेषण से साफ है कि ग्रामीण सरकार चलाने में महिलाएं पुरुषों से आगे निकल गई हैं, राज्य में कुल निर्वाचित प्रतिनिधियों में महिलाओं की भागीदारी 52 प्रतिशत रही है, जोकि निर्धारित 50 प्रतिशत आरक्षण से 2 प्रतिशत अधिक है। यह दर्शाता है कि महिलाएं न केवल आरक्षित सीटों पर अपितु सामान्य सीटों पर भी जीत दर्ज कर रही हैं। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 12 जिलों में से 11 जिलों में महिलाओं की भागीदारी 50 प्रतिशत से अधिक रही है। मात्र शिमला ही ऐसा जिला रहा, जहां महिलाओं का प्रतिशत 49.8 रहा। सबसे चौंकाने वाले और उत्साहजनक परिणाम जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति से आए हैं, जहां सर्वाधिक 68.2 प्रतिशत महिलाएं चुनी गईं। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि हिमाचल की ग्रामीण राजनीति में न केवल लैंगिक समानता आ रही है, अपितु महिलाएं अब नेतृत्व के मामले में पुरुषों को पीछे छोड़ रही हैं।
पंचायती राज चुनाव 2020-21 - लिंग आधारित विवरण
लाहौल-स्पीति में कुल प्रतिनिधियों में से 68.2 प्रतिशत महिलाएं व 31.8 प्रतिशत पुरुष तथा किन्नौर में 55.4 प्रतिशत महिलाएं व 44.6 प्रतिशत महिला प्रतिनिधि जीत कर आए थे। कांगड़ा जिला की कुल 6464 प्रतिनिधियों में 3547 यानि की 54.9 प्रतिशत में महिलाएं व 2917 यानि की 45.1 पुरुष जीत कर आए थे। वहीं चम्बा में कुल 2298 प्रतिनिधियों में से 1252 यानि की 54.5 प्रतिशत महिलाएं व 1046 यानि की 45.5 प्रतिशत पुरुष चुने गए थे। हमीरपुर में कुल 1900 प्रतिनिधियों में से 1008 यानि की 53.1 प्रतिशत महिलाएं व 892 यानि की 46.9 पुरुष चयनित हुए थे। मंडी में 4350 प्रतिनिधियों मेें से 2289 यानि की 52.6 प्रतिशत महिलाएं व 2061 यानि की 47.4 प्रतिशत पुरूष, सोलन में 52.0 महिलाएं व 47.9 पुरुष, बिलासपुर 1406 प्रतिनिधियों में से 731 यानि की 51.9 प्रतिशत महिलाएं व 675 यानि की 48 प्रतिशत, ऊना में 52 प्रतिशत महिलाएं व 47.9 प्रतिशत पुरुष चुन कर आए थे। शिमला की कुल 2331 प्रतिनिधियों में से 1162 यानि की 49.8 प्रतिशत महिलाएं व 1169 यानि की 50.2 प्रतिशत पुरुष जीते थे। इस प्रकार कुल 26734 प्रतिनिधियों में से 14144 यानि की 52 प्रतिशत महिलाएं व 12590 यानि की 48 प्रतिशत पुरुष प्रतिनिधि चयनित हुए थे।राज्य के सभी जिलों में महिलाओं की भागीदारी 50 प्रतिशत से अधिक रही, केवल शिमला जिला इसमें अपवाद रहा। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में सर्वाधिक 68.2 प्रतिशत महिलाएं निर्वाचित हुईं।
महिला सशक्तिकरण की मजबूत तस्वीर
किन्नौर 55.4 प्रतिशत, कांगड़ा 54.9 प्रतिशत, चम्बा 54.5 प्रतिशत और मंडी 52.6 प्रतिशत जैसे जिलों में महिलाओं की मजबूत उपस्थिति यह दर्शाती है कि पंचायत स्तर पर निर्णय प्रक्रिया में उनकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। यह रुझान ग्रामीण शासन में सामाजिक बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
शिमला को छोड़ हर जिले में आधे से अधिक आबादी महिलाओं की
आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के 12 जिलों में से 11 जिलों में महिलाओं की भागीदारी 50 प्रतिशत से अधिक रही है। केवल शिमला ही ऐसा जिला रहा जहां महिलाओं का प्रतिशत 49.8 रहा। सबसे चौंकाने वाले और उत्साहजनक परिणाम जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति से आए हैं, जहां सर्वाधिक 68.2 प्रतिशत महिलाएं चुनी गईं। हालांकि, आयोग का कहना है कि इस जिले के कुछ हिस्सों में चुनाव होने अभी शेष हैं।

