Kangra: पत्नी ने अपने पति को किडनी दान कर निभाया पति धर्म, टांडा में पहला रोबोटिक ''रीनल ट्रांसप्लांट''
punjabkesari.in Wednesday, Apr 22, 2026 - 09:51 PM (IST)
कांगड़ा (किशोर): हिमाचल प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान टांडा मैडीकल कालेज ने अपने पहले रोबोटिक रीनल ट्रांसप्लांट को सफलतापूर्वक पूरा करके एक महत्वपूर्ण उपलब्धी हासिल की है। कुल्लू की दुगलिंग निवासी 37 साल की महिला ने अपनी जान की परवाह न करते हुए पति के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी। 42 साल के अपने पति को अपनी एक किडनी दान देकर यह सिद्ध कर दिया कि पति-पत्नी का रिश्ता आपसी विश्वास, सम्मान, निस्वार्थ प्रेम और समझदारी का रिश्ता होता है। पति-पत्नी वर्षों से इकट्ठे अपना जीवन बिता रहे हैं लेकिन कुछ वर्ष पूर्व उसके पति को दोनों किडनियां खराब होने की जानकारी डाक्टरों ने दी, जिसके लिए वे बाहर प्रदेशों के निजी अस्पताल मैक्स तथा पीजीआई चंडीगढ़ के अतिरिक्त कई अन्य निजी अस्पतालों में जाकर इलाज के लिए भटकते रहे। अंत में थक हारकर वे टांडा अस्पताल के नैफ्रोलॉजिस्ट विभाग के डाक्टर के पास आए जिसके लिए उन्होंने सारे टैस्ट लेने के उपरांत किडनी को ट्रांसप्लांट करने के की सलाह दी।
वह दोनों पति-पत्नी टांडा के नैफ्रोलॉजिस्ट विभाग के विभागीय अध्यक्ष डाक्टर अभिनव राणा से मिले तथा उन्होंने उन दोनों को मोटिवेट किया और दोनों पति-पत्नी को किडनी ट्रांसप्लांट करने की सलाह दी तथा दोनों को सहमत कर दिया। इसके तत्पश्चात नैफ्रोलॉजिस्ट विभाग के विभागीय अध्यक्ष डाक्टर अभिनव राणा तथा डाक्टर अमित शर्मा सर्जन तथा उनकी टीम ने गत दिन पत्नी की किडनी को पति की किडनी में ट्रांसप्लांट करके टांडा में एक मिसाल कायम की। इस बाबत डाक्टर अभिनव ने बताया कि अभी दोनों पति-पत्नी टांडा के आईसीयू विभाग में उपचाराधीन हैं तथा दोनों स्वस्थ हैं। महिला को चार-पांच दिनों के उपरांत छुट्टी दे दी जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि जो किडनी को दान करता है वह अपनी जिंदगी आराम तथा सुख-समृद्धि से जीवन व्यतीत करता है, वहीं जिसको किडनी दी जाती है वह भी 15 से 20 वर्ष या इससे भी अधिक जीवन जीता है, उसे मैडीसिन भी लेनी पड़ती है।
टांडा में इस तरह की पहली रोबोटिक रीनल ट्रांसप्लांट है। मैडीकल कालेज के प्रधानाचार्य डाक्टर मिलाप शर्मा ने बताया कि रीनल ट्रांसप्लांट और नैफ्रोलॉजी विभाग ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जटिल प्रक्रिया का संचालन डा. अमित शर्मा, डा. सोमराज महाजन, डा. आशीष शर्मा, डा. दीपेश और डा. कुशाल सहित एक समर्पित सर्जिकल टीम द्वारा किया गया था, जिसमें डा. अभिनव राणा, डा. दिव्यम, डा. साक्षी और डा. हर्षिता सहित नैफ्रोलॉजी टीम के अमूल्य समर्थन के साथ किया गया। एनैस्थीसिया टीम का नेतृत्व डा. नानीश और उनकी टीम ने किया।
यह ऐतिहासिक प्रत्यारोपण एक जीवित-संबंधित एबीओ-संगत गुर्दे का प्रत्यारोपण था, जहां एक महिला लवली ने उदारतापूर्वक अपने पति अजय कुमार को एक गुर्दा दान किया, अंग दान की भावना का उदाहरण देते हुए और पारिवारिक समर्थन के माध्यम से जीवन को बचाया। डा. मिलाप ने बताया कि विशेष रूप से यह उपलब्धि टांडा में किए गए 23वें गुर्दे के प्रत्यारोपण का प्रतिनिधित्व करती है, जो गुर्दे के प्रत्यारोपण में संस्थान की बढ़ती विशेषज्ञता को और मजबूत करती है। रोबोटिक-सहायता प्राप्त सर्जरी की शुरूआत बढ़ी हुई सटीकता, कम सर्जिकल आघात, तेजी से वसूली और बेहतर रोगी परिणामों को लाती है।

