Himachal: सुक्खू सरकार ने शुरू की नई योजना, इन 5 बड़े जलाशयों के मछुआरों की चमकी किस्मत!
punjabkesari.in Sunday, Jul 26, 2026 - 03:54 PM (IST)
शिमला (संतोष): हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के मछुआरों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। मत्स्य संरक्षण और प्रजनन के उद्देश्य से हर साल मछली पकड़ने पर लगने वाले प्रतिबंध के दौरान मछुआरों को होने वाली आर्थिक तंगी से उबारने के लिए सरकार ने मुख्यमंत्री मछुआरा सम्मान निधि योजना की शुरूआत की है। इस योजना के तहत गैर-मत्स्यन अवधि (जब मछली पकड़ने पर रोक होती है) में पात्र मछुआरों को प्रतिवर्ष 3500 रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
इन 5 जलाशयों के 3700 परिवारों को मिलेगा लाभ
इस जनकल्याणकारी योजना का सीधा फायदा प्रदेश के प्रमुख जलाशयों पर निर्भर मछुआरों को मिलेगा। जानकारी के अनुसार गोबिंद सागर, पौंग बांध, कोल बांध, चमेरा और रंजीत सागर जलाशयों में काम करने वाले लगभग 3700 मछुआरा परिवारों को इस योजना से जोड़ा जाएगा। राज्य सरकार इस योजना के सफल संचालन और मछुआरों की मदद के लिए प्रतिवर्ष लगभग 1.20 करोड़ रुपए का बजट खर्च करेगी।
किसे और कैसे मिलेगी ये सम्मान निधि?
मत्स्य विभाग के अनुसार इस योजना का लाभ केवल उन्हीं सक्रिय मछुआरों को मिलेगा जो पंजीकृत मत्स्य सहकारी समितियों के सदस्य हैं और जिनके पास मछली पकड़ने का वैध लाइसैंस है। पात्र मछुआरों को आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन करना होगा। इसके बाद मत्स्य विभाग द्वारा आवेदनों का सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्वीकृत राशि डीबीटी प्रणाली के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाएगी।
समाज के हर वर्ग की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री
इस नई योजना को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में प्रदेश के मछुआरों का बहुमूल्य योगदान है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के समावेशी विकास के लिए पूर्णतया प्रतिबद्ध है और समाज के प्रत्येक वर्ग को सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री मछुआरा सम्मान निधि योजना प्रतिबंध के उस कठिन समय में मछुआरों को एक आवश्यक वित्तीय संबल प्रदान करेगी, जब उनकी आजीविका पूरी तरह से बंद हो जाती है। यह पहल सरकार की जनकल्याणकारी व्यवस्था को और मजबूत करने तथा विकास का लाभ दूरदराज के कमजोर वर्गों तक पहुंचाने की दिशा में एक ठोस कदम है।
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