Shimla: हाईकोर्ट ने नियमितीकरण का लाभ न देने पर सरकार को याद दिलाया उसका कर्त्तव्य
punjabkesari.in Wednesday, Apr 08, 2026 - 10:38 PM (IST)
शिमला (मनोहर): प्रदेश हाईकोर्ट ने अस्थायी कर्मचारियों से लंबे समय तक सेवाएं लेने पर भी उन्हें नियमितीकरण का लाभ न देने पर राज्य सरकार को उसका कर्त्तव्य याद दिलाया है। कोर्ट ने कहा कि यह राज्य सरकार का कर्त्तव्य है कि वह ऐसे कर्मचारियों को नियमितीकरण का लाभ प्रदान करे, जिन्होंने लंबी और निरंतर सेवा दी है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बीसी नेगी की खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए न्यायाधीश सत्येन वैद्य की एकल पीठ के फैसले को सही ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्त्ता का यह स्वीकृत मामला है कि कर्मचारी ने 2008 से नाममात्र के अंतराल के साथ सेवा की है। लगभग 18 वर्ष बीत चुके हैं और याचिकाकर्त्ता जोती ठाकुर वन विभाग में निरंतर कार्यरत रही है।
सरकार ने यह आपत्ति उठाई गई थी कि वह कभी भी वन विभाग/हिमाचल प्रदेश सरकार की कर्मचारी नहीं थी। राज्य सरकार द्वारा दायर जवाब में यह तर्क दिया गया था कि कर्मचारी ने वास्तव में वर्ष 2024 में ही न्यायालय का रुख किया था। याचिकाकर्त्ता को कार्रवाई का कारण वर्ष 2014 में मिला था और इसमें 10 वर्ष की देरी है। याचिकाकर्त्ता को प्रारंभ में स्वां नदी एकीकृत जलसंभर विकास परियोजना में समूह आयोजक के रूप में 25.07.2008 को नियुक्त किया गया था और उसने वहां 30.06.2016 तक कार्य किया।
इसके बाद उसने हिमाचल प्रदेश वन पारिस्थितिकी तंत्र जलवायु-प्रतिरोध परियोजना में ग्राम समूह आयोजक के रूप में 01.11.2016 से 30.09.2017 तक नियुक्त किया गया और अब वह स्रोत स्थिरता और जलवायु वर्षा-आधारित कृषि के लिए एकीकृत विकास परियोजना यानि आईडीपी में सामाजिक विस्तार अधिकारी के रूप में 09.03.2018 से कार्यरत हैं। एकल पीठ ने प्रार्थी की याचिका को स्वीकारते हुए याचिकाकर्त्ता की 6 वर्ष की अनुबंध सेवा पूर्ण होने के बाद, 06.01.2016 से सभी परिणामी लाभों सहित, उनकी सेवा को नियमित करने पर विचार करने का आदेश दिया था, जबकि वित्तीय लाभों को याचिका दायर करने की तिथि से 3 वर्ष पूर्व तक सीमित कर दिया था।

