kangra: कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में फीस वृद्धि और सीटों में कटौती
punjabkesari.in Monday, Aug 03, 2026 - 09:54 PM (IST)
पालमपुर (भृगु): कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में नए शैक्षणिक सत्र से फीस वृद्धि तथा विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों में सीटों की कटौती करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के विरोध में अब छात्र मुखर होने लगे हैं। इसी कड़ी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर इकाई ने सोमवार को ई-मेल अभियान चलाया। अभियान के दौरान विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों एवं विभागों के 200 से अधिक विद्यार्थियों ने हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) को ई-मेल भेजकर फीस वृद्धि और सीटों में कटौती के निर्णयों को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की।
एबीवीपी कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर इकाई की अध्यक्ष शैफाली ठाकुर ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने 23 जुलाई से नई फीस संरचना लागू करने के साथ ही स्नातक, स्नातकोत्तर एवं शोध कार्यक्रमों में सीटों की संख्या भी कम कर दी है। परिषद का कहना है कि इन निर्णयों का सबसे अधिक असर आर्थिक रूप से कमजोर, ग्रामीण क्षेत्रों तथा सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों पर पड़ेगा। कृषि प्रधान राज्य हिमाचल प्रदेश में कृषि शिक्षा को सुलभ बनाने के बजाय उसे महंगा और सीमित किया जाना चिंताजनक है।
नई सीट मैट्रिक्स पर जताई आपत्ति
परिषद ने विश्वविद्यालय द्वारा जारी नई सीट मैट्रिक्स पर भी आपत्ति दर्ज कराई है। एबीवीपी के अनुसार बी.एससी. ऑनर्स कृषि में आईसीएआर श्रेणी की सीटें 25 से घटाकर 11, राज्य ई.डब्ल्यू.एस. सीटें 10 से घटाकर 3 तथा आईसीएआर ईडब्ल्यूएस सीटें 3 से घटाकर 1 कर दी गई है। वहीं सैल्फ फाइनांसिंग सीटों की संख्या 51 से बढ़ाकर 71 कर दी गई है। परिषद का आरोप है कि सामान्य एवं अन्य श्रेणियों की सीटों में कटौती और एसएफएस सीटों में वृद्धि से आर्थिक रूप से अधिक शुल्क देने वाले विद्यार्थियों को प्राथमिकता मिलने का संदेश जाता है। एबीवीपी ने पूर्व निर्धारित सीटों को बहाल करने तथा सभी वर्गों के लिए संतुलित एवं न्यायसंगत सीट वितरण सुनिश्चित करने की मांग की है। फीस वृद्धि को लेकर भी परिषद ने कड़ा विरोध जताया है।
इन फीस दरों में की गई बढ़ौतरी
एबीवीपी के अनुसार स्नातक स्तर पर ट्यूशन फीस 8500 रुपए से बढ़ाकर 13500 रुपए कर दी गई है। इन्फ्रास्ट्रक्चर फीस 1500 से 2000 रुपए तथा स्टूडैंट वैल्फेयर फीस 1000 से 1500 रुपए कर दी गई है। इसके अतिरिक्त स्पोर्ट्स, सह-पाठ्यक्रम, अमलगमेटेड एवं ग्रीन कैंपस सहित अन्य विभिन्न शुल्कों में भी 28 से 80 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है। परिषद का कहना है कि इससे विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। एबीवीपी के अनुसार स्नातकोत्तर एवं शोध स्तर पर भी फीस में उल्लेखनीय बढ़ौतरी की गई है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार एम.एससी. कार्यक्रमों की सामान्य फीस में 34.67 प्रतिशत, पीएच.डी. कार्यक्रमों की सामान्य फीस में 35.89 प्रतिशत तथा विभिन्न डिग्री कार्यक्रमों के विविध शुल्कों में औसतन 44.71 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। परिषद का कहना है कि बढ़ती महंगाई के दौर में इतनी बड़ी फीस वृद्धि के कारण अनेक मेधावी विद्यार्थी आर्थिक कारणों से उच्च कृषि शिक्षा से वंचित हो सकते हैं। ई-मेल अभियान के माध्यम से एबीवीपी ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से मामले में शीघ्र हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।

