Kullu: ढोल-नगाड़ों के साथ ढालपुर पहुंचे भगवान रघुनाथ, बारिश में राम-भरत का मिलन देख भावुक हुए लोग
punjabkesari.in Friday, Jan 23, 2026 - 06:30 PM (IST)
कुल्लू (दिलीप): जिला मुख्यालय ढालपुर में शुक्रवार को प्रकृति के कड़े तेवरों के बीच आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। जिला में सुबह से जारी भारी बारिश और ऊंची चोटियों पर बर्फबारी भी श्रद्धालुओं के उत्साह को कम नहीं कर पाई। परंपरा का निर्वहन करते हुए भगवान रघुनाथ की भव्य रथयात्रा के साथ कुल्लू घाटी में 40 दिवसीय होली उत्सव का विधिवत शुभारंभ हो गया।
शुक्रवार दोपहर को भगवान रघुनाथ रघुनाथपुर स्थित अपने मुख्य मंदिर से ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर ढालपुर मैदान के लिए रवाना हुए। मंदिर परिसर से लेकर ढालपुर तक का माहौल भक्तिमय हो गया। यहां पहुंचने पर भगवान की विधिवत पूजा-अर्चना की गई, जिसके बाद उन्हें विशेष रूप से सजाए गए रथ पर विराजमान किया गया। श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के जयघोष के बीच रथ को खींचकर ढालपुर मैदान के अस्थायी शिविर तक पहुंचाया।
बसंत पंचमी पर ढालपुर मैदान में त्रेतायुग के दृश्यों का जीवंत चित्रण देखने को मिला। परंपरा के अनुसार महंत खानदान के एक व्यक्ति ने भरत की भूमिका निभाई। हजारों लोगों की उपस्थिति में राम-भरत के मिलन का दृश्य अत्यंत भावुक था, जहां भरत अपने बड़े भाई श्रीराम से अयोध्या वापस लौटने की प्रार्थना करते दिखाई दिए। इस पौराणिक परंपरा को देखने के लिए भारी बारिश के बावजूद भीड़ जुटी रही।
राम-भरत मिलन के पश्चात हनुमान जी की अठखेलियां आकर्षण का मुख्य केंद्र रहीं। केसरी रंग में रंगे हनुमान ने मैदान में मौजूद श्रद्धालुओं के साथ होली खेली। स्थानीय मान्यता है कि हनुमान जी जिस श्रद्धालु पर रंग डालते हैं, उसे बजरंगबली का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस विश्वास के साथ लोग हनुमान जी से रंग लगवाने के लिए लालायित दिखे। वहीं बैरागी समुदाय के लोगों ने पारंपरिक होली के गीत गाकर वातावरण को उत्सव के रंग में सराबोर कर दिया।
बसंत पंचमी पर भगवान रघुनाथ की कृपा पाने के लिए अधिकांश श्रद्धालु पीले वस्त्र पहनकर पहुंचे थे। इस उत्सव के साथ ही कुल्लू में होली का त्यौहार निर्धारित समय से 40 दिन पहले शुरू हो गया। अब अगले 40 दिनों तक भगवान रघुनाथ के मंदिर में प्रतिदिन गुलाल फैंका जाएगा। होली पर्व से 8 दिन पूर्व यहां होलाष्ठक का विशेष आयोजन किया जाएगा, जिसके बाद फाल्गुन पूर्णिमा को इस उत्सव का समापन होगा।

