धूप में दरका पहाड़: कुल्लू में साफ मौसम के बीच भी दरक गया पहाड़, देखें खौफनाक मंजर
punjabkesari.in Tuesday, Feb 24, 2026 - 01:34 PM (IST)
कुल्लू। कुल्लू की मणिकर्ण घाटी में प्रकृति का एक डरावना रूप देखने को मिला है। मंगलवार सुबह जब खिली हुई धूप और साफ मौसम था, तभी अचानक 'घाटीगढ़' के पास एक विशाल पर्वत का हिस्सा ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इस अप्रत्याशित घटना ने स्थानीय निवासियों और विशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया है कि क्या अब देवभूमि के पहाड़ बिना मौसम के ही जवाब दे रहे हैं?
मौत को छूकर निकलीं गाड़ियां
भूस्खलन का मंजर इतना खौफनाक था कि वहां मौजूद लोगों की सांसें अटक गईं। चालकों की सूझबूझ और किस्मत ने साथ दिया कि उन्होंने ऐन मौके पर ब्रेक लगा दिए, वरना एक बड़ा हादसा टलना नामुमकिन था। वर्तमान में मणिकर्ण-बरशैणी मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप हो चुका है।
आखिर बिना बारिश क्यों गिर रहे हैं पहाड़?
साफ मौसम में इस तरह की तबाही के पीछे जानकारों का मानना है कि पिछली बारिश और बर्फबारी के कारण पहाड़ों की आंतरिक संरचना अस्थिर हो चुकी है। पानी के रिसाव ने चट्टानों की पकड़ कमजोर कर दी है, जिसके चलते अब बिना किसी बाहरी दबाव के भी पत्थर और मलबा नीचे गिर रहा है। यह स्थिति और भी घातक है क्योंकि शांत मौसम में राहगीर अक्सर बेफिक्र रहते हैं।
पर्यटन और दैनिक जीवन पर 'पत्थरों' का पहरा
मणिकर्ण साहिब और खीरगंगा जाने वाले हजारों यात्री सहमे हुए हैं। स्कूल जाने वाले बच्चे, मरीज और रोजमर्रा की सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित है। बार-बार लगने वाले इस जाम से घाटी के पर्यटन व्यवसाय पर बुरा असर पड़ रहा है।
केवल सफाई नहीं, अब 'इलाज' की जरूरत
क्षेत्रीय लोगों में प्रशासन के प्रति गहरा रोष है। उनका तर्क है कि जेसीबी से मलबा हटा देना महज एक "बैंड-एड" लगाने जैसा है। जनता की मुख्य मांगें हैं कि पहाड़ी का वैज्ञानिक तरीके से उपचार (Technical Treatment) किया जाए। बेहद मजबूत रिटेनिंग वॉल का निर्माण हो। आपात स्थिति के लिए एक सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग की योजना बनाई जाए।
विभाग की कार्रवाई
लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता, गोविंद ठाकुर ने स्पष्ट किया कि प्राथमिकता मार्ग को दोबारा सुचारू करने की है। भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए मणिकर्ण में स्थायी रूप से मशीनरी तैनात कर दी गई है ताकि किसी भी भूस्खलन की स्थिति में तुरंत रिस्पॉन्स दिया जा सके।

