Himachal : फोरेंसिक रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, उत्तर पुस्तिकाओं से की गई छेड़छाड़; कई छात्र मेरिट सूची से बाहर

punjabkesari.in Friday, Apr 03, 2026 - 04:47 PM (IST)

Bilaspur News : हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की परीक्षाओं में पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दरअसल, बिलासपुर जिले के झंडूता स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ज्योरा से जुड़े परीक्षा परिणाम विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है। छात्रों और उनके अभिभावकों ने प्रेसवार्ता कर उत्तर पुस्तिकाओं में कथित छेड़छाड़ के गंभीर आरोप लगाए हैं और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

ड्राइंग विषय के अंकों ने खड़ा किया विवाद

दरअसल, छात्रों और उनके अभिभावकों ने बिलासपुर स्थित सर्किट हाउस में एक प्रेस वार्ता आयोजित कर उत्तर पुस्तिकाओं में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ (टेंपरिंग) किए जाने के सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। प्रेस वार्ता में उपस्थित छात्रों ने अपने अभिभावकों के साथ बताया कि झंडूता परीक्षा केंद्र में दी गई परीक्षाओं के परिणाम घोषित होने पर वे दंग रह गए। विशेषकर ड्राइंग विषय में मेधावी छात्रों को बहुत ही कम अंक मिले, जिसके कारण कई छात्र मेरिट सूची से बाहर हो गए।

फॉरेंसिक जांच में हुआ 'टेंपरिंग' का खुलासा

अभिभावकों का दावा है कि जब उन्होंने इस विसंगति की शिकायत स्कूल शिक्षा बोर्ड से की, तो मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर पुस्तिकाओं की फॉरेंसिक जांच करवाई गई। जांच के बाद आई फॉरेंसिक रिपोर्ट में उत्तर पुस्तिकाओं की लिखावट और मूल उत्तरों के साथ छेड़छाड़ की पुष्टि हुई। परिजनों का कहना है कि यह गड़बड़ी मुख्य रूप से ज्योरा स्कूल के 11 छात्रों की कॉपियों में पाई गई है, जिससे किसी सोची-समझी साजिश का संदेह पैदा हो रहा है। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि जिस स्कूल में परीक्षा आयोजित की गई थी, उसी को नियमों के विपरीत 'एग्जामिनेशन कलेक्शन सेंटर' बनाया गया था। उनका कहना है कि परीक्षा के बाद उत्तर पुस्तिकाएं कुछ समय तक स्कूल परिसर में ही रखी गईं, जहां संभवतः यह छेड़छाड़ की गई।

न्याय की गुहार और सख्त कार्रवाई की मांग

घटना को एक वर्ष बीत जाने के बावजूद अभी तक किसी भी दोषी के खिलाफ ठोस कार्रवाई न होने पर परिजनों ने गहरा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच करवाई जाए। उत्तर पुस्तिकाओं में छेड़छाड़ करने वाले अधिकारियों या कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कानूनी मामला दर्ज किया जाए। प्रभावित छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए अंकों में सुधार की प्रक्रिया अपनाई जाए। छात्रों का कहना है कि उनकी कड़ी मेहनत पर पानी फेरने वालों को बेनकाब करना शिक्षा प्रणाली की शुचिता बनाए रखने के लिए अनिवार्य है।

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Content Editor

Swati Sharma

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