Mandi: बड़ा देव विष्णु मतलोड़ा के हूम में उमड़ा आस्था का सैलाब, दैवीय शक्तियों के प्रभाव से भाव-विभोर हुए श्रद्धालु

punjabkesari.in Thursday, Oct 29, 2026 - 10:54 PM (IST)

गोहर (सतीश): मंडी जिले की सराज घाटी के देव कांढा में वीरवार को बड़ा देव विष्णु मतलोड़ा का प्रसिद्ध हूम (कार्तिक जाग) हर्षोल्लास और पारंपरिक देव आस्था के साथ संपन्न हो गया है। इस भव्य धार्मिक अनुष्ठान में केवल स्थानीय लोग और देवता के देवलू ही नहीं, बल्कि मंडी, कुल्लू सहित प्रदेश के अन्य जिलों से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु नतमस्तक होने पहुंचे। इस दौरान पूरा देव कांढा क्षेत्र देवता के जयकारों और वाद्य यंत्रों की धुनों से गूंज उठा।

तड़के 4 बजे निकली देवता की भव्य जलेब
देवता के हूम उत्सव को लेकर बुधवार शाम से ही देव कांढा में भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया था, जो वीरवार को जनसैलाब में बदल गया। बुधवार शाम को बागाचनोगी की चोहट कोठी में सात हारों के कारकूनों के साथ आराध्य देवता मतलोड़ा विष्णु के सुशोभित होने की पवित्र प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद वीरवार तड़के करीब 4 बजे देवता अपने पूरे लाव-लश्कर और वाद्य यंत्रों की थाप के साथ अपने मूल स्थान 'देव कांढा' के लिए रवाना हुए। देवता की इस भव्य जलेब (शोभायात्रा) में हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

गौ पूजा कर मांगा सुरक्षा कवच
देवता कमेटी के पुजारी पुष्प राज ने बताया कि इस बार के हूम उत्सव में विशेष रूप से गौ पूजा का आयोजन किया गया। देव परंपराओं का निर्वहन करते हुए देवता विष्णु मतलोड़ा से पूरे क्षेत्र और इलाके की रक्षा के लिए सुरक्षा कवच प्रदान करने का आग्रह किया गया। तड़के जब देवता का रथ मंदिर के नजदीक पहुंचा, तो वहां का पूरा वातावरण अलौकिक और भक्तिमय हो गया। मंदिर परिसर में पहुंचते ही कई महिलाओं और पुरुषों पर दैवीय शक्तियों का प्रभाव (खेल) देखा गया, जिसे देखकर वहां मौजूद श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। इसके पश्चात मंदिर परिसर में देवता की परिक्रमा करवाई गई और तमाम पारंपरिक देव रस्में पुजारियों व कारकूनों द्वारा विधिवत रूप से निभाई गईं।

मन्नतें पूरी होने पर हुए बच्चों के मुंडन संस्कार
हूम उत्सव के दौरान मंदिर परिसर में आराध्य देव का आशीर्वाद लेने के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। लोगों ने देवता के समक्ष माथा टेककर पूरे साल के लिए अपने और अपने परिवार की सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। इसके अलावा, जिन श्रद्धालुओं की मन्नतें पूरी हुई थीं, उन्होंने देव परंपरा के अनुसार मंदिर परिसर में अपने बच्चों के मुंडन संस्कार भी करवाए।

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Content Writer

Vijay

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