Shimla: प्रदेश में सरकार और मुख्यमंत्री के खिलाफ अविश्वास का माहौल : जयराम
punjabkesari.in Tuesday, Mar 17, 2026 - 08:15 PM (IST)
शिमला (ब्यूरो): नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि आगामी विधानसभा सत्र सरकार के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण रहने वाला है, क्योंकि विपक्ष ने प्रदेश में ठप्प पड़े विकास कार्यों, कानून व्यवस्था की दयनीय स्थिति और अन्य जनहित के मुद्दों पर नियमबद्ध नोटिस दिए हैं, जिनका जवाब देना सरकार के लिए टेढ़ी खीर साबित होगा। विधानसभा परिसर स्थित अपने कार्यालय में मीडिया से औपचारिक बातचीत के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे प्रदेश में इस समय कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री के खिलाफ अविश्वास का एक माहौल खड़ा हुआ है। जो ये दर्शाता है कि जनता इस सरकार से खुश नहीं है।
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री पर सदन को लगातार झूठ बोलकर गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह सरकार की कार्यशैली का हिस्सा बन चुका है और मुख्यमंत्री के भ्रामक बयानों को विशेषाधिकार हनन का मामला मानते हुए इसकी गहन जांच की आवश्यकता है। उन्होंने परंपराओं के उल्लंघन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश के संसदीय इतिहास में संभवतः यह पहली बार हुआ है जब राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा को जानबूझकर लंबित रखा गया है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सरकार इस समय भारी असमंजस और वैचारिक भटकाव की स्थिति से गुजर रही है।
राज्य की चरमराती आर्थिक स्थिति को सबसे बड़ा मुद्दा बताते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने वित्तीय संकट और विकास कार्यों पर लगे विराम को लेकर सरकार से जवाब मांगा है, लेकिन सत्ता पक्ष के पास इन बुनियादी सवालों का कोई ठोस उत्तर नहीं है। ठाकुर ने प्रदेश में सक्रिय भू-माफिया और बिचौलियों पर प्रहार करते हुए कहा कि धारा 118 के नाम पर लोगों को गुमराह कर अवैध उगाही करने वाला एक बड़ा गिरोह सक्रिय है, जिसके चलते प्रदेश से उद्योगों का निरंतर पलायन हो रहा है और साढ़े तीन साल बीत जाने के बाद भी जनहित के संस्थानों को बंद करने का सिलसिला थमा नहीं है।
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने एंटी करप्शन ब्यूरो और विजीलैंस विभाग को सूचना का अधिकार के दायरे से बाहर करने के निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताई और सवाल किया कि आखिर सरकार ऐसी कौन सी गोपनीय बातें हैं जिन्हें जनता से छिपाना चाहती है। उन्होंने तंज कसा कि जिस आरटीआई कानून को डा. मनमोहन सिंह की सरकार पारदर्शी शासन के लिए लाई थी।
कैबिनेट रैंक वापस लेने का फैसला केवल सुर्खियां बटोरने के लिए
सरकारी संस्थानों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कैबिनेट रैंक वापस लेने की हालिया प्रक्रिया महज जनता की आंखों में धूल झोंकने का एक असफल प्रयास है, क्योंकि यदि सरकार वास्तव में फिजूलखर्ची रोकना चाहती थी, तो यह निर्णय माननीय न्यायालय द्वारा मुख्य संसदीय सचिवों को हटाए जाने के तुरंत बाद लिया जाना चाहिए था। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि जब सारा सरकारी खजाना अपने खास मित्रों में लुटा दिया गया है, तब केवल सुर्खियां बटोरने के लिए किए जा रहे ऐसे दिखावटी पैंतरे जनता स्वीकार नहीं करेगी और सरकार को सदन के भीतर एक-एक पैसे के हिसाब और अपने कुशासन का जवाब देना ही होगा।

