Shimla: जयराम ठाकुर और उनकी सुरक्षा में तैनात कर्मियों व सरकार को नोटिस
punjabkesari.in Thursday, Mar 05, 2026 - 10:16 PM (IST)
शिमला (मनोहर): प्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और उनकी सुरक्षा में तैनात पुलिस कर्मियों के खिलाफ आईपीसी के तहत प्राथमिकी दर्ज करवाने के आदेश की मांग को लेकर दायर याचिका में नोटिस जारी किया है। एचआरटीसी सेवानिवृत्त कर्मी व हिमाचल परिवहन मजदूर संघ के पूर्व अध्यक्ष शंकर सिंह ठाकुर ने इनके खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र कर उसका अपमान करने और अपने सुरक्षा कर्मियों के साथ मिलकर उसका अपहरण करने के बाद उसके साथ मारपीट कर गंभीर चोटें पहुंचाने के आरोप लगाए हैं। न्यायाधीश राकेश कैंथला ने मामले की सुनवाई के पश्चात संभावित आरोपियों सहित सरकार को भी नोटिस जारी किया है। मामले के अनुसार याचिकाकर्त्ता ने एसएचओ बरमाणा को उपरोक्त आरोप लगाते हुए शिकायत सौंपी थी परंतु प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई।
इसके बाद चीफ ज्यूडीशियल मैजिस्ट्रेट बिलासपुर के समक्ष एक शिकायत दर्ज की थी, जिसमें शिकायतकर्त्ता शंकर सिंह ठाकुर ने जयराम ठाकुर सहित उनके ड्राइवर देवेंद्र कुमार, पुलिस कर्मी भूपेंद्र सिंह, सवर्ण सिंह, धर्मेश्वर, पवन कुमार और निजी सचिव भरत कुमार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 341, 363, 323, 325, 504 और 120बी के तहत प्राथमिकी दर्ज करने के लिए स्टेशन हाऊस ऑफिसर, पुलिस स्टेशन बरमाणा, जिला बिलासपुर को उचित निर्देश देने की मांग की थी। प्रार्थी की शिकायत को बिलासपुर की जिला अदालतों ने खारिज कर दिया था, जिनके खिलाफ प्रार्थी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। प्रार्थी की शिकायत के अनुसार अगस्त 2023 में भारी बारिश के कारण एक बड़े भूस्खलन की वजह से हाईवे कुछ दिनों से ब्लॉक था।
17 अगस्त, 2023 को जब हाईवे खुला तो प्रार्थी अपने गांव साई नोडवान से नमहोल लौट रहा था। इस दौरान वहां किलोमीटर तक ट्रैफिक जाम था। प्रार्थी के अनुसार जब वह अपने मोबाइल से ट्रैफिक जाम का वीडियो रिकॉर्ड कर रहा था, ताकि वह उस वीडियो को सोशल मीडिया पर डाल सके और अधिकारियों को गंभीर स्थिति के बारे में पता चल सके और आम जनता के हित में तुरंत एक्शन लिया जा सके। शिकायत के अनुसार ट्रैफिक जाम की वजह से पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की इनोवा कार भी ट्रैफिक जाम में फंस गई थी, क्योंकि दोनों तरफ लंबी लाइनें थीं। याचिकाकर्त्ता के अनुसार जयराम ठाकुर याचिकाकर्त्ता को देखकर गुस्सा हो गए और वह अपनी कार से उतर कर याचिकाकर्त्ता की तरफ दौड़े और अन्य आरोपी पुलिस कर्मियों को आदेश दिए कि वे याचिकाकर्त्ता को सबक सिखाने के लिए उसकी पिटाई करें।
आरोपियों ने तुरंत उसे अपनी एक गाड़ी में खींच लिया और उसे गाड़ी के अंदर घूंसे और लातें मारीं। याचिकाकर्त्ता ने पुलिस चौकी नम्होल के इंचार्ज से अपनी शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया लेकिन उन्होंने प्राथमिकी दर्ज नहीं की और याचिकाकर्त्ता यह सुनकर हैरान रह गया कि आरोपियों की शिकायत पर याचिकाकर्त्ता के खिलाफ झूठी प्राथमिकी दर्ज कर दी गई। इसके बाद याचिकाकर्त्ता को मजबूर होकर सी.एम. हैल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करनी पड़ी, लेकिन उन्होंने मामले में अपनी लाचारी दिखाई और याचिकाकर्त्ता की शिकायत पर ध्यान नहीं दिया।

