Shimla: सेब सीजन में गाड़ी हायर करने वाला सामान का मालिक कोई अनधिकृत यात्री नहीं : हाईकोर्ट
punjabkesari.in Wednesday, Jul 22, 2026 - 10:31 PM (IST)
शिमला (मनोहर): हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मोटर वाहन दुर्घटना मुआवजा मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी फसल (जैसे सेब) मंडियों तक पहुंचाने के लिए कमर्शियल गाड़ी किराए (हायर) पर लेता है और उसी गाड़ी में सफर करता है तो उसे 'अनधिकृत' या 'मुफ्त में लिफ्ट लेने वाला यात्री' नहीं माना जा सकता। वह कानूनन सामान का मालिक' कहलाता है और दुर्घटना की स्थिति में बीमा कंपनी अपनी देनदारी से बच नहीं सकती। न्यायाधीश विरेंदर सिंह ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरैंस कंपनी द्वारा दायर अपील पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। 20 जुलाई 2011 की रात को ठियोग के चेतू ढाबा के पास एक पिकअप गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस हादसे में 24 वर्षीय युवक दीपक कुमार की मौत हो गई थी। दीपक ने परवाणू से अपने गांव 'देवरी खनेटी' तक सेब की फसल चंडीगढ़ मंडी ले जाने के उद्देश्य से गाड़ी को हायर किया था और वह उसी में सवार होकर घर लौट रहा था।
शिमला के क्लेम ट्रिब्यूनल ने साल 2017 में मृतक के माता-पिता को 9,99,800 रुपए का मुआवजा देने का आदेश जारी किया था, जिसका भुगतान बीमा कंपनी को करना था। बीमा कंपनी ने हाईकोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी थी। कंपनी की ओर से तर्क दिया गया कि हादसे के वक्त गाड़ी खाली थी और कोई सामान लोड नहीं था, इसलिए मृतक एक 'मुफ्त का यात्री' था जो पॉलिसी के नियमों का उल्लंघन है। यह दुर्घटना जुलाई के महीने में हुई, जो हिमाचल के इस क्षेत्र में सेब का पीक सीजन होता है। फसल लाने के लिए गाड़ी हायर करने वाले व्यक्ति का उसी गाड़ी में सफर करना पूरी तरह स्वाभाविक और प्राकृतिक है। गाड़ी बुक करने के बाद सफर करने वाले को लिफ्ट लेने वाला नहीं कहा जा सकता, भले ही उस समय गाड़ी में माल लोड होना बाकी हो।

