Shimla: वन क्षेत्रों की सड़कों पर अगले आदेश तक कोई निर्माण या टारिंग नहीं की जाएगी : हाईकोर्ट

punjabkesari.in Tuesday, Oct 13, 2026 - 10:23 PM (IST)

शिमला (मनोहर): प्रदेश हाईकोर्ट ने पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील इलाकों में सड़क निर्माण से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए 17 अगस्त, 2026 के अपने पिछले आदेश को दोहराया है कि अगले आदेश तक वन क्षेत्रों की सड़कों पर कोई निर्माण या टारिंग नहीं की जाएगी। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बीसी नेगी की खंडपीठ ने पारित किया। एमिकस क्यूरी (न्यायालय मित्र) ने एक चार्ट पेश किया, जिसमें दिखाया गया कि सेराज विधानसभा क्षेत्र और नाचन वन मंडल में हिमाचल प्रदेश वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 का उल्लंघन करते हुए 55 सड़कों का निर्माण किया गया है। इससे पता चलता है कि यूजर एजैंसी से प्रस्ताव अभी मिलना बाकी है, लेकिन ज्यादातर मामलों में सड़कें पहले ही बन चुकी हैं।

इस बात पर भी जोर दिया गया कि वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत गलत तरीके से अनुमति दी गई, जो स्पष्ट रूप से न तो वन निवासियों के हित में है और न ही जंगल के हित में। साथ ही यह भी बताया गया कि सेराज में 16 हैलीपैड हैं और वन क्षेत्रों में ऐसी सुविधाओं से वन्यजीव परेशान हो रहे हैं। इसलिए इस क्षेत्र पर पड़ने वाले असर का आकलन जरूरी है, क्योंकि सड़कों के निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर हरे-भरे पेड़ काटे गए थे। इस मामले की अगली सुनवाई 2 दिसम्बर, 2026 को होगी।


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Kuldeep

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