Shimla: आरक्षण, एट्रोसिटी एक्ट, धर्मांतरण और यूजीसी नीतियों के खिलाफ सवर्ण समाज ने भरी हुंकार, सरकार को दी आंदोलन की चेतावनी
punjabkesari.in Wednesday, Mar 18, 2026 - 01:58 PM (IST)
रोहड़ू (बशनाट): शिमला जिले के उपमंडल रोहड़ू में सवर्ण समाज ने विभिन्न ज्वलंत और संवेदनशील मुद्दों को लेकर अपनी आवाज बुलंद कर दी है। बुधवार को रोहड़ू, जुब्बल, छौहारा, डोडरा-क्वार और टिक्कर क्षेत्र के नागरिकों ने एकजुट होकर राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन उपमंडल अधिकारी (एसडीएम) रोहड़ू के माध्यम से प्रेषित किया। सवर्ण समाज ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर उनकी मांगों को अनसुना किया गया, तो वे सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
ज्ञापन के जरिए सवर्ण समाज ने देश और प्रदेश से जुड़े चार प्रमुख मुद्दों पर सरकार का ध्यान खींचा है। सवर्ण समाज ने वर्तमान आरक्षण व्यवस्था पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे आर्थिक आधार पर लागू करने की जोरदार मांग उठाई है। उनका तर्क है कि जातिगत आधार पर दी जा रही आरक्षण व्यवस्था की अब निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए, ताकि समाज के उस वास्तविक और जरूरतमंद वर्ग को इसका लाभ मिल सके, जो सच में पिछड़ा हुआ है। ज्ञापन में एट्रोसिटी एक्ट (एससी/एसटी एक्ट) के कथित दुरुपयोग का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया है। समाज के प्रतिनिधियों का आरोप है कि इस कानून की आड़ में कई बार निर्दोष लोगों को झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है, जिससे न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस कानून की निष्पक्ष समीक्षा की जाए और झूठी शिकायतें करने वालों पर कठोर दंड का प्रावधान हो।
सवर्ण समाज ने जबरन धर्मांतरण की बढ़ती घटनाओं पर भी गहरा रोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि इस तरह की अवैध गतिविधियां हमारे सामाजिक ताने-बाने और संस्कृति को कमजोर कर रही हैं। समाज ने सरकार से अपील की है कि धर्मांतरण के मामलों पर सख्त से सख्त रोक लगाई जाए और दोषियों के खिलाफ बिना किसी रियायत के कठोर कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही ज्ञापन में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की वर्तमान नीतियों पर भी गहरा असंतोष व्यक्त किया गया। सवर्ण समाज का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। छात्रों और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए इन नीतियों की पुनः समीक्षा की जानी चाहिए।
मांगें नहीं मानीं तो होगा उग्र आंदोलन
सवर्ण समाज संगठन ने सरकार को सीधी चेतावनी दी है। प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि यह ज्ञापन महज एक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि लाखों लोगों की जनभावनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति है। यदि सरकार ने इन ज्वलंत मुद्दों पर शीघ्र और सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में भारी जन समर्थन के साथ एक उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।

