Mandi: अपनी लकीर खींचने की बजाय हमारी मिटाने में लगे हैं मुख्यमंत्री : जयराम

punjabkesari.in Wednesday, Jun 17, 2026 - 06:00 PM (IST)

मंडी (रजनीश): मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पूर्व भाजपा सरकार के समय शुरू की गईं योजनाओं की सफलता से ईर्ष्या करते हैं और यही मुख्य कारण है कि वह सहारा और हिमकेयर जैसी स्वास्थ्य योजनाओं को या तो बजट की कटौती करके पूरी तरह बंद करना चाहते हैं या फिर उनके खिलाफ दुष्प्रचार करके उन्हें लगातार बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं। ये आरोप बुधवार को मंडी में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने लगाए हैं। जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री अगर आप अपने साढ़े 3 साल के इस कार्यकाल में विकास की कोई नई और बड़ी लकीर नहीं खींच पाए हैं, तो कम से कम हमारे द्वारा जनता की भलाई के लिए खींची गई विकास की बड़ी लकीर को मिटाने या उसे छोटा करने की ओछी कोशिश तो मत कीजिए।

पूर्व मुख्यमंत्री ने बुधवार को पंचायत समिति जंजैहली और बालीचौकी के नवनिर्वाचित पंचायत समिति सदस्यों और अन्य जन प्रतिनिधियों से मुलाकात की। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि सराज विधानसभा क्षेत्र के छड़यांद निवासी सुरेश कुमार जीवित हैं, लेकिन सरकारी तंत्र ने कागजों में उन्हें मृत घोषित कर उनकी सहारा योजना की वित्तीय सहायता राशि रोक दी है। उन्होंने कहा कि कैंसर और पैरालिसिस जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे जरूरतमंद मरीजों के लिए सहारा योजना एक बहुत बड़ी जीवनदायिनी राहत थी, लेकिन ऐसे संवेदनशील मामलों में इस तरह की लापरवाही सरकार की पूरी कार्यशैली और उसकी नीयत पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

जनता के दिलों में जगह बनाने के लिए होनी चाहिए नीयत और सेवा भावना
जयराम ने मुख्यमंत्री पर सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष और मेरे खिलाफ व्यक्तिगत दुष्प्रचार करने के लिए मुख्यमंत्री ने एक विशेष सोशल मीडिया सैल बना रखा है, जिसे सरकारी खजाने से करोड़ों रुपए की भारी-भरकम राशि दी जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री को नसीहत देते हुए कहा कि जनता के दिलों में जगह बनाने के लिए सरकारी पैसों से दुष्प्रचार की नहीं, बल्कि साफ नीयत और सेवा भावना की जरूरत होती है। मुख्यमंत्री की यह विशेष टीम सरकार की अपनी नीतियों और विकास योजनाओं का जमीनी स्तर पर प्रसार करने की बजाय दिन-रात केवल विपक्ष को गालियां देने और उन्हें नीचा दिखाने के काम में व्यस्त रहती है, जोकि लोकतंत्र और देवभूमि हिमाचल की राजनीतिक परंपराओं के लिहाज से बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है।


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Content Writer

Kuldeep

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