Mandi: बेटे को खोया, बेटियों की जिम्मेदारी निभाई, फिर भी नहीं रुकी जिबु की सुबह की दौड़
punjabkesari.in Thursday, Sep 10, 2026 - 05:59 PM (IST)
30 साल से हर दिन सुबह 5 बजे उठकर घर-घर पहुंचा रहे पंजाब केसरी, अखबार के साथ बना अटूट रिश्ता
गोहर (सतीश): सुबह के 5 बजे जब अधिकांश घरों में लोग सोए होते हैं, उस समय चैलचौक के जय सिंह राणा (जिबु) अपने दिन की शुरूआत कर देते हैं। हाथों में अखबारों का बंडल और मन में जिम्मेदारी का भाव लिए वे निकल पड़ते हैं उन घरों की ओर, जहां लोग उनके पहुंचने का इंतजार करते हैं। यह सिलसिला एक-दो साल नहीं, बल्कि पूरे 30 वर्षों से लगातार जारी है। करीब तीन दशक पहले वरिष्ठ पत्रकार बीके ठाकुर की प्रेरणा से जय सिंह राणा का पंजाब केसरी के साथ जुड़ाव शुरू हुआ था। तब से लेकर आज तक समय बदला, परिस्थितियां बदलीं, लेकिन पंजाब केसरी के साथ उनका रिश्ता नहीं बदला। सुबह 5 बजे उठकर लोगों के घर-द्वार तक अखबार पहुंचाना उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गया।
जिंदगी ने दिए गहरे जख्म, लेकिन कदम नहीं रुके
जय सिंह राणा की जिंदगी में खुशियों के साथ ऐसे दुख भी आए, जिन्होंने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। पाधरू गांव से चैलचौक आकर बसे राणा ने अखबार वितरण और दुकान की कमाई से अपनी जमीन खरीदी और उसी पर अपना घर बनाया। परिवार को संभालते हुए उन्होंने अपनी 3 बेटियों की पढ़ाई-लिखाई और शादी की जिम्मेदारी पूरी की। इसी बीच इकलौते बेटे की सड़क दुर्घटना में मौत ने परिवार पर ऐसा बज्रपात किया, जिसे सहना किसी भी पिता के लिए आसान नहीं था। जिस बेटे की परवरिश में जीवन का एक बड़ा हिस्सा लगा दिया, उसका यूं अचानक दुनिया से चले जाना जय सिंह राणा के लिए गहरा आघात था। मगर इस असहनीय दुख के बीच भी उन्होंने खुद को संभाला और अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हटे।
अखबार सिर्फ कमाई का जरिया नहीं, एक रिश्ता बन गया
जय सिंह राणा के लिए पंजाब केसरी केवल अखबार बांटने का काम नहीं है। 3 दशक में यह उनके जीवन का ऐसा हिस्सा बन गया, जिससे उनका भावनात्मक रिश्ता जुड़ गया है। वे बताते हैं कि पंजाब केसरी के साथ उनका रिश्ता आज भी इसलिए मजबूत है क्योंकि विजय चोपड़ा और अविनाश चोपड़ा का एजैंटों के प्रति प्यार और अपनापन हमेशा बना रहा। उनके अनुसार यही स्नेह रिश्ते की डोर को आज तक थामे हुए है। जय सिंह राणा कहते हैं कि समय परिवर्तनशील है। समय के साथ परिस्थितियां बदलती रहती हैं, लेकिन जब तक पाठकों की रुचि पंजाब केसरी के साथ बनी हुई है, तब तक वह भी अखबार की सप्लाई देते रहेंगे।

