Mandi: डंगवांस की रात से शुरू हुआ देवताओं और डायनों का युद्ध, धधकते अंगारों पर नाचे गुर
punjabkesari.in Thursday, Sep 10, 2026 - 08:06 PM (IST)
मंडी (रजनीश): हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक और देव राजधानी मंडी में सदियों पुरानी मान्यताओं व देव परंपराओं से जुड़ा देवताओं और डायनों का युद्ध एक बार फिर जनमानस और क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। लोक परंपरा के अनुसार डगवांस की रात्रि से इस अदृश्य देव-दानव युद्ध की शुरूआत मानी जाती है। इसी कड़ी में पुरानी मंडी स्थित अत्यंत प्राचीन सिद्धपीठ श्री देवी महाकाली मंदिर में आयोजित 62वें जग (होम) के अवसर पर देव-परंपरा के वाहक गुर ने देववाणी के माध्यम से इस युद्ध से जुड़ी कई पौराणिक और प्रामाणिक मान्यताओं को उजागर किया।
वार्षिक जाग होम में धधकते अंगारों पर गुर नाचे। मंदिर परिसर में गूंजी देववाणी के अनुसार देवताओं और डायनों के बीच यह संघर्ष कुल 7 अलग-अलग युद्धों की एक शृंखला होती है। मान्यता है कि इन 7 युद्धों में से कम से कम 4 युद्ध जीतने वाले पक्ष का पलड़ा भारी हो जाता है और विजय प्राप्त करने वाले पक्ष के हाथ में सिख पाथा का नियंत्रण आ जाता है। इसी सिख पाथा के आधार पर आने वाले वर्ष में क्षेत्र की दिशा और दशा तय मानी जाती है।
एकादश की रात को समुद्र टापू से होती है युद्ध की शुरूआत
लोक मान्यताओं के मुताबिक इस अलौकिक युद्ध की शुरूआत एकादश की रात को समुद्र टापू से होती है। इसके बाद विभिन्न स्थानों से होते हुए इसका अंतिम और निर्णायक युद्ध प्रसिद्ध घोघरधार में लड़ा जाता है। मंडी की स्थानीय देव संस्कृति में इन युद्धों को लेकर कई लोककथाएं और अलग-अलग परंपराएं प्रचलित हैं, जो सदियों से पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही हैं। इस बार जाग के दौरान सामने आई देववाणी के आधार पर वर्तमान में डायनों का पलड़ा भारी माना जा रहा है।
देवताओं की जीत का अर्थ : लोक मान्यता के अनुसार यदि इस युद्ध में देवताओं की विजय होती है तो पूरे क्षेत्र में सुख-समृद्धि, अच्छी फसलें और शांति बनी रहती है।
डायनों की जीत का अर्थ: इसके विपरीत यदि डायनों की जीत का संकेत मिलता है तो इसे प्राकृतिक आपदाओं, बीमारियों या आने वाले समय में किसी बड़े संकट के रूप में देखा जाता है।
यद्यपि ये सभी बातें विशुद्ध रूप से धार्मिक आस्था, लोक मान्यताओं और सदियों पुरानी देव परंपराओं पर आधारित हैं तथा इनके पीछे कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, फिर भी छोटी काशी मंडी की समृद्ध देव संस्कृति में इन मान्यताओं का अत्यंत विशिष्ट महत्व है।

