Una: शिवबाड़ी मेले में पकड़े गए अजगरों के मामले में... वन विभाग ऊना ने शुरू की जांच
punjabkesari.in Tuesday, Feb 17, 2026 - 07:30 PM (IST)
गगरेट (बृज/हनीश): महाशिवरात्रि मेले में शिवबाड़ी आकर यहां से सपेरों से करीब 12 अजगर पंजाब ले जाने वाली संस्था की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। बिना वन विभाग को सूचित किए संस्था के सदस्यों द्वारा यहां आकर की गई कार्रवाई के बाद अजगरों को वन विभाग के सुपुर्द करने की बजाय अपने साथ ले जाने के मामले का वन मंडल अधिकारी ने कड़ा संज्ञान लिया है। वन मंडल अधिकारी ने इस प्रकरण की जांच का जिम्मा रेंज ऑफिसर राहुल ठाकुर को दिया है जिस पर वन रेंज अधिकारी ने इस प्रकरण की जांच शुरू कर दी है।
महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य पर शिवबाड़ी में लगे मेले में बाहर से आए हुए सपेरे अपने साथ अजगर व सांप लेकर मेले में पहुंचे थे। इसी बीच होशियारपुर की एक संस्था के सदस्य यहां पहुंचे और इसे वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के विपरीत बताते हुए सपेरों से अजगर लेकर इन्हें सुरक्षित जंगल में छोड़ने की बात कहकर अपने साथ ले गए। हालांकि न तो इस दौरान पुलिस को सूचित किया गया और न ही वन विभाग को।
इस बावत एक सोशल मीडिया चैनल द्वारा बनाया गया वीडियो वायरल होने लगा तो इसकी भनक वन विभाग के अधिकारियों को लगी। वन मंडल अधिकारी सुशील राणा ने बताया कि कानूनन कोई व्यक्ति कानून की मदद तो कर सकता है लेकिन कानून अपने हाथ में नहीं ले सकता। अगर पंजाब की संस्था के सदस्यों ने वन्य जीवों को किसी के पास देखा भी था तो इसकी सूचना वन विभाग को दी जानी चाहिए थी।
इससे उन लोगों पर भी कार्रवाई नहीं हो पाई जो असली आरोपी थे। रेंज ऑफिसर राहुल ठाकुर ने इस संबंध में जानकारियां एकत्रित करनी शुरू कर दी हैं। प्रारंभिक जांच में उन्हें पता चला है कि उक्त संस्था द्वारा पंजाब के वाइल्ड लाइफ विंग से संपर्क किया था। इसकी लिखित में जानकारी मंगवाई गई है। अब संस्था के सदस्यों को पूछताछ के लिए यहां बुलाया जा सकता है।
पंजाब वाइल्ड लाइफ विंग ने भी जारी किया चेतावनी पत्र
पंजाब वाइल्ड लाइफ विंग ने आपत्ति जताते हुए स्पष्ट किया कि वन्य जीवों के रैस्क्यू, हैंडलिंग और स्थानांतरण जैसे कार्य केवल संबंधित राज्य के वन विभाग की पूर्व अनुमति और अधिकृत निगरानी में ही किए जा सकते हैं। उन्होंने होशियारपुर की संस्था को जारी चेतावनी पत्र में निर्देश दिए हैं कि भविष्य में वन्य जीव मामलों में स्वतंत्र रूप से हस्तक्षेप न किया जाए और किसी भी रैस्क्यू कार्रवाई से पहले संबंधित वन विभाग से अनुमति और समन्वय सुनिश्चित किया जाए। इस पूरे घटनाक्रम की अनुपालन रिपोर्ट हिमाचल प्रदेश वन विभाग को भी भेज दी गई है जिससे मामला अब औपचारिक विभागीय जांच के दायरे में आ गया है।

