Shimla : महिला संघ एडवा ने हिमाचल में महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर चिंता की व्यक्त, लगाया ये आरोप

punjabkesari.in Friday, Jun 19, 2026 - 10:47 AM (IST)

Shimla News : अखिल भारतीय लोकतांत्रिक महिला संघ (एडवा) की हिमाचल प्रदेश इकाई ने राज्य में महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। संघ ने आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ चुकी है, जिससे महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गये हैं।

'ऐसी घटनाओं ने महिलाओं के मन में डर और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी'

संघ की राज्य अध्यक्ष रंजना जारेट और राज्य सचिव फाल्मा चौहान ने गुरुवार को एक साझा बयान जारी कर राज्य के अलग-अलग हिस्सों से सामने आयी महिलाओं की हत्या की हालिया घटनाओं की कड़े शब्दों में निंदा की। दोनों ने शिमला जिले में एक ही हफ्ते के भीतर हुई दो अलग-अलग घटनाओं का जिक्र किया। इनमें रोहड़ू में एक महिला की गोली मारकर की गयी हत्या और एक बुजुर्ग महिला का गला घोंटने का मामला शामिल है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं ने महिलाओं के मन में डर और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। महिला संगठन ने मंडी, कांगड़ा, सरकाघाट, कुल्लू और सैंज सहित विभिन्न जिलों में महिलाओं के खिलाफ हुई हिंसा के हालिया मामलों का भी हवाला दिया और कहा कि इन दुखद घटनाओं के जख्म अभी भी लोगों के दिलों में ताज़ा हैं।

'ऐसे अपराधों का बार-बार होना एक चिंताजनक स्थिति'

संघ के अनुसार, ऐसे अपराधों का बार-बार होना एक चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है, जिस पर सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है। महिला संगठन की नेताओं ने आरोप लगाया कि महिला कल्याण को लेकर राज्य सरकार के दावे जमीनी स्तर पर सुरक्षा देने में नाकाम साबित हुए हैं। हिमाचल प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से हत्या, यौन उत्पीड़न, अपहरण और प्रताड़ना के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जो मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर कमियों को उजागर करते हैं। आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए संघ ने दावा किया कि साल 2026 में अब तक राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 478 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें से 49 मामले नाबालिगों के साथ यौन अपराधों से जुड़े यौन अपराधों से बाल संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) के तहत दर्ज किए गए हैं।


संगठन ने यह भी दावा किया कि इस अवधि के दौरान छेड़छाड़ के 117 और महिलाओं के अपहरण के लगभग 110 मामले भी दर्ज किए गए हैं। संघ ने आरोप लगाया कि घरेलू हिंसा और क्रूरता के कई मामले अक्सर दर्ज ही नहीं हो पाते या स्थानीय स्तर पर ही सुलझा लिए जाते हैं, जिससे पीड़तिों को न्याय नहीं मिल पाता और इस तरह की हिंसा की असली तस्वीर सामने नहीं आ पाती। महिलाओं के खिलाफ अपराधों में शामिल लोगों पर सख्त कारर्वाई की मांग करते हुए संघ ने राज्य सरकार से मामलों की तेजी से जांच करने और आरोपियों को कड़ी सजा सुनिश्चित करने की अपील की है। संगठन ने सरकार से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, पुलिस प्रशासन को बेहतर बनाने और राज्य भर में महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। 


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Content Editor

Swati Sharma

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