Shimla: आरडीजी बंद होने से राज्य के बजट पर पड़ेगा 15 फीसदी प्रभाव : सुक्खू

punjabkesari.in Monday, Mar 02, 2026 - 05:14 PM (IST)

शिमला (कुलदीप): राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने से उत्पन्न हालात से निपटने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। उन्होंने इस मुलाकात के बाद नई दिल्ली में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि आरडीजी बंद होने से राज्य के बजट पर 15 फीसदी प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मैंने केंद्रीय वित्त मंत्री से कहा कि हमारी समस्या का समाधान कीजिए। इसके बाद केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार की तरफ से हरसंभव मदद का प्रयास किया जाएगा। ऐसे में अब देखते हैं कि आगे क्या होता है? उन्होंने स्पष्ट किया कि बड़े राज्य आरडीजी बंद होने से उत्पन्न स्थितियों का सामना कर सकते हैं, लेकिन हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था इसका सामना करने के लिए तैयार नहीं है।

राज्य में राजस्व जुटाने की क्षमता कम है और व्यय अधिक है। इसकी भरपाई के लिए भारत के संविधान में आर्टिकल 275(1) का प्रावधान किया गया था। उन्होंने वित्तीय वर्ष 2026-27 के राजस्व घाटे की प्रतिपूर्ति करने के लिए स्पैशल सैंट्रल असिस्टैंस के तहत एक वित्तीय पैकेज प्रदान करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि नागालैंड के बाद राज्य को आरडीजी के योगदान के रूप में लगभग 12.7 फीसदी प्राप्त होते थे। उन्होंने इसे बंद करने के निर्णय को को-आप्रेटिव फैडरलिज्म की भावना को कमजोर करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है कि वित्तायोग ने छोटे पहाड़ी राज्यों की विकास की आवश्यकताओं को पूरी तरह से नजरअंदाज किया है।

उन्होंने वित्त मंत्री को बताया कि प्रदेश सरकार की तरफ से पिछले 2-3 वर्षों में व्यय को कम करने के दृष्टिगत कई निर्णायक कदम उठाए गए हैं। इसके तहत कोई ऑफ-बजट बॉरोंइग नहीं लिया गया और अलग-अलग सैस के जरिए हर वर्ष लगभग 600 करोड़ रुपए जुटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि जीएसटी की वजह से भी राज्य के राजस्व को नुक्सान हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आवश्यकताओं के अनुरूप टैक्स रेट बढ़ाने और सबसिडी के युक्तिकरण जैसे उपाए लागू करने के बावजूद राजस्व घाटे के अंतर को कम नहीं कर सकती है।

पहाड़ी राज्य अर्थव्यवस्था सुधार आकलन के लिए कमेटी बने
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्रीय वित्त मंत्री से पहाड़ी राज्यों की अर्थव्यवस्था के सही आकलन और सुधारों के दृष्टिगत एक कमेटी बनाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि मैदानी क्षेत्र और पहाड़ी इलाकों की भौगोलिक हालात एक जैसे नहीं हैं, जिस कारण अलग-अलग पैमानों को अपनाया जाना चाहिए।


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Kuldeep

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