Shimla: हिमाचल हाईकोर्ट ने पर्यावरण की दृष्टि से कमजोर इलाकों में सड़कों के निर्माण पर लगाई रोक

punjabkesari.in Wednesday, Aug 19, 2026 - 10:58 PM (IST)

शिमला (मनोहर): प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के अत्यधिक संवेदनशील और पर्यावरण की दृष्टि से कमजोर क्षेत्रों में बिना स्थानीय आबादी के अंधाधुंध सड़कों के निर्माण और बढ़ते पर्यटन पर कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए खुद संज्ञान लिया है और इसे एक जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

अदालत ने अपने आदेश में विशेष रूप से चंद्रताल झील, शिकारी देवी मंदिर और चूड़धार मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों का उदाहरण दिया। कोर्ट ने कहा कि इन क्षेत्रों में कोई स्थानीय आबादी नहीं है, फिर भी वन संरक्षण अधिनियम के तहत मंजूरी देकर वाहनों की आवाजाही के लिए पक्की सड़कें बनाई जा रही हैं। मोटर वाहनों की सीधी पहुंच होने के कारण इन पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यावरण का तेजी से क्षरण हो रहा है और भारी संख्या में पेड़ों की कटाई हो रही है।

हाईकोर्ट ने वन विभाग द्वारा चंद्रताल झील के आसपास पर्यटकों को रात में रुकने की अनुमति देने पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने चिंता व्यक्त की कि रात में रुकने वाले पर्यटकों द्वारा उत्पन्न होने वाले मानव अपशिष्ट और प्लास्टिक कचरे के निपटान की क्या व्यवस्था है? क्या वहां मोबाइल शौचालय उपलब्ध हैं और प्लास्टिक मैनेजमैंट के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं?

अदालत ने स्थिति की समीक्षा और जवाबदेही तय करने के लिए प्रधान सचिव (वन) सहित प्रधान मुख्य वन संरक्षक, सदस्य सचिव, हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रतिवादी बनाते हुए नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए निर्देश दिया है कि इन चिन्हित संवेदनशील क्षेत्रों में नई सड़कें बनाने या पुरानी सड़कों को पक्का करने के लिए वन विभाग से मंजूरी के जितने भी प्रस्ताव विचाराधीन हैं, उन सभी को फिलहाल स्थगित किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 28 सितम्बर 2026 को तय की गई है।


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Kuldeep

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