Shimla: कर्मचारियों को नियमित करने में देरी करना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन : हाईकोर्ट
punjabkesari.in Monday, Aug 10, 2026 - 10:01 PM (IST)
शिमला (मनोहर): प्रदेश हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग में कार्यरत लैक्चरर्स (स्कूल-न्यू) को बड़ी राहत देते हुए उनके हक में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने साफ किया है कि अनुबंध अवधि पूरी होने के बाद प्रशासनिक देरी या चुनाव आचार संहिता के बहाने कर्मचारियों को नियमित करने में देरी करना उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने मोहिंदर सिंह और अन्य शिक्षकों द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया। मामले के अनुसार याचिकाकर्त्ताओं की नियुक्ति वर्ष 2021 में अनुबंध के आधार पर लैक्चरार (स्कूल-न्यू) के पद पर हुई थी। सरकार की नीति के अनुसार, 31 मार्च 2024 तक दो साल की निरंतर अनुबंध सेवा पूरी करने वाले कर्मचारी नियमितीकरण के पात्र थे। याचिकाकर्त्ताओं ने यह अवधि नवम्बर-दिसम्बर 2023 में ही पूरी कर ली थी। इसके बावजूद, शिक्षा विभाग ने लोकसभा चुनाव और उपचुनाव की आदर्श आचार संहिता का हवाला देते हुए उन्हें देरी से 6 जुलाई 2024 को नियमित किया।
शिक्षकों ने सरकार की उस नीति (क्लॉज IX) को चुनौती दी थी, जिसके तहत नियमितीकरण केवल आदेश जारी होने की तारीख से (यानी भविष्य के प्रभाव से) लागू किया जाता था। अदालत ने राज्य सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया कि चुनाव आचार संहिता के कारण देरी हुई। कोर्ट ने कहा कि आचार संहिता समाप्त होने के बाद सरकार को "पुनर्स्थापन के सिद्धांत" का पालन करते हुए देय तिथि से लाभ देना चाहिए था। कोर्ट ने नियमितीकरण नीति की शर्त नंबर IX को याचिकाकर्त्ताओं के मामले में अप्रभावी और अमान्य घोषित कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यह शर्त कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों का हनन करती है और राज्य सरकार अपनी मर्जी से इसमें देरी नहीं कर सकती।
कोर्ट ने कहा कि स्थापित परंपराओं से हटकर याचिकाकर्त्ताओं के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया गया है कि वे याचिकाकर्त्ताओं को उनकी पात्रता की देय तिथि यानी 1 अप्रैल 2024 से नियमित कर्मचारी का दर्जा दें। शिक्षकों को 1 अप्रैल 2024 से ही नियमित वेतनमान, वेतन निर्धारण और सभी परिणामी लाभ दिए जाएं।

