Shimla: अभिभावक अदालत सबूतों के आधार पर बच्चों की कस्टडी से जुड़े मामलों को देखने में सक्षम : हाईकोर्ट

punjabkesari.in Wednesday, Feb 25, 2026 - 10:32 PM (IST)

शिमला (मनोहर): प्रदेश हाईकोर्ट ने पति-पत्नी के आपसी झगड़े में बच्चे की कस्टडी को लेकर महत्वपूर्ण व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया है कि अभिभावक अदालत सबूतों के आधार पर बच्चों की कस्टडी से जुड़े मामलों को देखने में सक्षम हैं। कोर्ट ने बच्चे की कस्टडी की मांग को लेकर पिता द्वारा दायर रिट याचिका को अमान्य ठहराते हुए यह व्यवस्था दी है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बीसी नेगी की खंडपीठ ने कहा कि पति-पत्नी में आपसी झगड़े के कारण बच्चे की कस्टडी को लेकर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका मान्य नहीं हो सकती।

मामले के अनुसार याचिकाकर्त्ता की प्रतिवादी से शादी 25.02.2012 को हुई थी। उनकी शादी से लड़की का जन्म 06.07.2017 को कांगड़ा जिले में हुआ था। दोनों पति-पत्नी और बेटी चंडीगढ़, मुंबई व बेंगलुरु सहित अलग-अलग जगहों पर रहे और फिर आखिरकार, बैंकॉक थाईलैंड चले गए, जहां याचिकाकर्त्ता अभी भी रह रहा है। 10.10.2025 को पत्नी नाबालिग बच्चे के साथ भारत आई। दीवाली के बाद भारत से लौटने पर वह 25 से 26 नवम्बर, 2025 तक अस्पताल में भर्ती रही, जिसके कारण उसका भाई 26.11.2025 को बैंकॉक पहुंचा।

उसके बाद वह याचिकाकर्त्ता की पत्नी को लेकर 13.12.2025 को बैंकॉक से चला गया। याचिकाकर्त्ता 15.12.2025 को बैंकॉक अपने घर लौटा तो उसे पता चला कि बच्चे का सारा सामान घर से हटा दिया गया था। उसके बाद मामले को सुलझाने की बार-बार कोशिश की गई, लेकिन पत्नी ने अपना नंबर बदल दिया और काऊंसलिंग के प्रस्तावों का जवाब नहीं दिया। पिता ने हाईकोर्ट में बच्ची की कस्टडी को लेकर रिट याचिका दायर की थी।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

Kuldeep

Related News