Shimla: हिमाचल की टॉप अफसरशाही विवादों के घेरे में

punjabkesari.in Wednesday, Apr 01, 2026 - 10:44 PM (IST)

शिमला (कुलदीप): हिमाचल प्रदेश की टॉप अफसरशाही इन दिनों विवादों के घेरे में है। इस विवाद का मुख्य कारण सोलन का चेस्टर हिल बेनामी सौदा मामला है, जिसे लेकर मौजूदा मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने 2 पूर्व मुख्य सचिवों आर.डी. धीमान और प्रबोध सक्सेना के ऊपर सीधे तौर पर निशाना साधा है। इसमें से 2 पूर्व मुख्य सचिव इस समय टॉप स्तर पर सेवाएं दे रहे हैं। मुख्य सचिव की कुर्सी से उतरने के बाद प्रबोध सक्सेना हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड के अध्यक्ष पद पर सेवाएं दे रहे हैं, जबकि उनसे पहले मुख्य सचिव रह चुके आरडी धीमान रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) के अध्यक्ष हैं।

हिमाचल की अफसरशाही में इससे पहले भी विभिन्न कारणों से विवाद रहा है। बीते वर्ष जब आईएएस लॉबी दूसरे कॉडर के सचिवों को पद से हटाने के मुद्दे पर मुखर हो चुकी है। इसके अलावा सरकार को विमल नेगी मौत मामले के समय अतिरिक्त मुख्य सचिव, तत्कालीन डीजीपी एवं एसपी शिमला को जबरन छुट्टी पर भेजना पड़ा था। इस बार विषय भ्रष्टाचार से जुड़ा है, जिसके बाद विपक्षी भाजपा ने विधानसभा में मामला उठाया।

दूसरों पर सवाल उठाने वाले खुद कटघरे में : सत्ती
हिमाचल प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष एवं विधायक सतपाल सिंह सत्ती का आरोप है कि दूसरों पर सवाल उठाने वाले आज खुद कटघरे में खड़े हैं। उन्होंने कहा कि जिस कांग्रेस ने विपक्ष में रहते हुए पूर्व भाजपा सरकार के समय मुख्य सचिव की नियुक्ति पर सवाल खड़े किए थे, उस पार्टी ने सत्ता में आने पर उसी अधिकारी को 3 वर्ष की एक्सटैंशन देकर सलाहकार बनाया है। उन्होंने कहा कि इस बार सीधे तौर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

नौकरशाही में आपसी लड़ाई, वस्तुस्थिति की जानकारी लेंगे : सुक्खू
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि नौकरशाही में आपसी लड़ाई होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह वस्तुस्थिति की जानकारी लेंगे। यदि किसी भी स्तर पर कुछ गलत होगा तो उसका संज्ञान लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रबोध सक्सेना को मुख्य सचिव पद पर इसलिए एक्सटैंशन दी गई, क्योंकि उनका काम अच्छा था।


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Kuldeep

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