Shimla: मुख्य कर्जदार से पहले गारंटर से लोन वसूल सकता है बैंक, जिम्मेदारी दोनों की बराबर : हाईकोर्ट
punjabkesari.in Monday, Sep 21, 2026 - 10:22 PM (IST)
शिमला (मनोहर): प्रदेश हाईकोर्ट ने लोन डिफॉल्ट से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया है कि बैंक से लोन लेते समय गारंटी देने वाले व्यक्ति की देनदारी मुख्य कर्जदार के समान होती है। कोर्ट ने कहा कि बैंक या ऋणदाता इस बात के लिए बाध्य नहीं है कि वह गारंटर के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले मुख्य कर्जदार से वसूली के सभी उपाय खत्म करे। यह पूरी तरह से बैंक (डिक्री-धारक) का विवेक है कि वह किससे पहले वसूली करना चाहता है।
न्यायाधीश रोमेश वर्मा ने याचिकाकर्त्ता (गारंटरों) की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने निचली अदालत द्वारा उनकी संपत्ति की नीलामी के आदेश को चुनौती दी थी। कांगड़ा सैंट्रल को-ऑप्रेटिव बैंक ने साल 2012 में मुख्य कर्जदार मैसर्स अखिल स्टील ट्रेडर्स और गारंटरों के खिलाफ 10,99,287 रुपए की वसूली के लिए एक दीवानी मुकद्दमा दायर किया था। मुख्य कर्जदार ने 2009 में 10 लाख रुपए का लोन लिया था, जिसके लिए याचिकाकर्त्ताओं ने गारंटर के तौर पर गारंटी डीड निष्पादित की थी।
वरिष्ठ सिविल जज, नादौन ने 26 फरवरी 2019 को बैंक के पक्ष में फैसला सुनाया और सभी प्रतिवादियों को 12.50 प्रतिशत ब्याज के साथ संयुक्त उत्तरदायी ठहराया। इस फैसले को किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी गई, जिससे यह अंतिम हो गया। इसके बाद बैंक ने वसूली के लिए निष्पादन याचिका दायर की, जिस पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत ने 28 मार्च 2026 को गारंटरों की संपत्ति की बिक्री के लिए वारंट जारी कर दिया।
गारंटरों की दलील दी थी कि चूंकि मुख्य कर्जदार के पास पर्याप्त संपत्ति है, इसलिए बैंक को पहले उससे वसूली करनी चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून के तहत जब तक अनुबंध में कुछ अलग न कहा गया हो, गारंटर की जिम्मेदारी मुख्य कर्जदार के बराबर होती है। गारंटर भुगतान करने से पहले बैंक को यह शर्त नहीं दे सकता कि वह पहले मुख्य कर्जदार के खिलाफ कानूनी उपाय तलाशे।

