Shimla: सरकारी आवासों के आबंटन पर हाईकोर्ट सख्त: पूर्व सीपीएस के बाद अब पत्रकारों के कब्जे पर मांगी रिपोर्ट
punjabkesari.in Thursday, Sep 17, 2026 - 09:25 PM (IST)
शिमला (मनोहर): हिमाचल प्रदेश में सरकारी आवासों के नियम विरुद्ध आबंटन और अवैध कब्जों को लेकर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट द्वारा 'स्वतः संज्ञान' के तहत ली गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पूर्व मुख्य संसदीय सचिवों को दिए गए विशेष लाभ और सरकारी अधिकारियों की कीमत पर पत्रकारों को बांटे गए मकानों पर सवाल उठाए हैं। 5 अगस्त 2026 को हुई सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई थी कि सरकार ने हिमाचल प्रदेश सरकारी आवास आबंटन (सामान्य पूल) नियम, 1994 के नियम 24 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर 6 पूर्व मुख्य संसदीय सचिवों के रहने को नियमित कर दिया था। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि यदि हाईकोर्ट ने इस मामले में नोटिस जारी न किया होता, तो राज्य सरकार इस पूरे मामले को कालीन के नीचे दबा देती।
इस पर मुख्य न्यायाधीश जीएस संधवालिया की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मुख्य सचिव से हलफनामा मांगा था कि पूर्व में ऐसे कितने कर्मचारियों को विशेष अनुमति दी गई है और इन 6 लोगों को बिना आवेदन के यह विशेष लाभ क्यों दिया जा रहा है? राज्य सरकार पिछली सुनवाई के आदेश के बावजूद अपना हलफनामा दायर करने में विफल रही। इसी बीच अदालत को सूचित किया गया कि राज्य में अन्य सरकारी अधिकारियों की कीमत पर बड़ी संख्या में सरकारी आवासों पर पत्रकारों का कब्जा है।
इस पर संज्ञान लेते हुए मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ राज्य सरकार को एक और नया हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है। सरकार को अब यह स्पष्ट करना होगा कि पत्रकारों द्वारा कुल कितने सरकारी आवास घेरे गए हैं? उन्हें किस कानून या प्रावधान के तहत ये आवास आबंटित किए गए? इन आबंटनों की तारीखें क्या हैं और उन्हें किस श्रेणी (टाइप) के मकान दिए गए हैं? हाईकोर्ट ने सरकार के ढुलमुल रवैये और हलफनामा न सौंपने पर नाराजगी जताते हुए मामले की अगली सुनवाई 28 अक्तूबर, 2026 तय की है। तब तक राज्य सरकार को पूर्व सीपीएस और पत्रकारों, दोनों ही मामलों में विस्तृत ब्यौरा अदालत के समक्ष पेश करना होगा।

