Shimla: बेरोजगार पत्नी और बच्चे के लिए 7,500 गुजारा भत्ता अत्यधिक नहीं माना जा सकता : हाईकोर्ट
punjabkesari.in Monday, Sep 14, 2026 - 09:06 PM (IST)
शिमला (मनोहर): हाईकोर्ट ने गुजारा भत्ता के एक मामले में टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि एक बेरोजगार पत्नी और 4 साल के बच्चे के लिए 7,500 रुपए प्रति माह का गुजारा भत्ता किसी भी तरह से अत्यधिक नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि आज के समय में इस राशि में बच्चे की पढ़ाई और बुनियादी जरूरतों के साथ जीवनयापन करना बेहद मुश्किल है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश योगेश जसवाल की खंडपीठ ने पति द्वारा दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को खारिज करते हुए यह आदेश दिया।
पत्नी का आरोप था कि बच्चे के जन्म के समय ससुराल पक्ष से कोई उसे देखने नहीं आया और सारा खर्च उसके माता-पिता ने उठाया। बाद में पति के परिवार ने उसे वापस घर ले जाने से मना कर दिया, जिससे वह मानसिक तनाव के कारण अपने पिता के घर रहने को मजबूर हो गई। मंडी के प्रिंसीपल जज (फैमिली कोर्ट) ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत पत्नी और उनके नाबालिग बच्चे के पक्ष में 7,500 रुपए की कुल मासिक रखरखाव राशि (4,000 रुपए पत्नी को और 3,500 रुपए बच्चे को) मंजूर की थी।
इसके साथ ही 8,000 रुपए का मुकद्दमा खर्च भी देने का आदेश दिया था। अदालत ने संज्ञान लिया कि 4 साल का बच्चा अब स्कूल जाने लगा है, जिससे पत्नी का खर्च और बढ़ेगा। वर्तमान में पत्नी के पास कमाई का कोई जरिया नहीं है और वह अपने माता-पिता पर निर्भर है, ऐसे में यह गुजारा भत्ता उनके अस्तित्व के लिए बेहद जरूरी है।

