करसोग में बस रूट बंद होने पर बवाल, विधायक सहित स्थानीय लोगों ने दिया धरना...26 सितम्बर को चक्का जाम का अल्टीमेटम
punjabkesari.in Friday, Sep 11, 2026 - 11:59 PM (IST)
करसोग (धर्मवीर): हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला के करसोग क्षेत्र में चरमराई परिवहन व्यवस्था को लेकर स्थानीय जनता का गुस्सा शुक्रवार को फूट पड़ा। कुन्हों-घड़ाथा क्षेत्र के लिए चलने वाले 4 बस रूटों को बंद किए जाने के विरोध में स्थानीय लोगों ने विधायक दीप राज के नेतृत्व में करसोग बस अड्डा स्थित हिमाचल पथ परिवहन निगम कार्यालय में धरना-प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने हिस्सा लिया और बस सेवाओं की तत्काल बहाली की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की।
फर्श पर बैठकर आरएम ने सुनी लोगों की समस्या
प्रदर्शन के दौरान हालात ऐसे बन गए कि एचआरटीसी के क्षेत्रीय प्रबंधक (आरएम) को स्वयं कार्यालय से बाहर आकर जनता के बीच फर्श पर बैठना पड़ा और उनकी समस्याएं सुननी पड़ीं। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि बस रूट बंद होने से ग्रामीण इलाकों का संपर्क कट गया है। सबसे अधिक परेशानी स्कूली विद्यार्थियों, कर्मचारियों, बुजुर्गों और मरीजों को झेलनी पड़ रही है, जिनके लिए रोजमर्रा की आवाजाही एक बड़ी चुनौती बन गई है।
विधायक का आरोप-निजी ऑप्रेटरों को फायदा पहुंचाने की साजिश
धरने का नेतृत्व कर रहे करसोग के विधायक दीप राज ने प्रदेश सरकार और एचआरटीसी की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि करसोग क्षेत्र में बिना किसी ठोस कारण के करीब 35 बस रूट बंद कर दिए गए हैं। विधायक ने कहा कि यह कदम निजी बस ऑप्रेटरों को लाभ पहुंचाने की नीयत से उठाया गया है, जिसका सीधा खामियाजा ग्रामीण जनता भुगत रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी परिवहन का मुख्य उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि दूरदराज के क्षेत्रों में जनता को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाना है।
26 सितम्बर तक का अल्टीमेटम, दी चक्का जाम की चेतावनी
एचआरटीसी के आरएम द्वारा घड़ाथा के लिए बस सेवा तुरंत शुरू करने के आश्वासन के बाद शुक्रवार को धरना समाप्त कर दिया गया। हालांकि, विधायक दीप राज ने प्रशासन को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि महज आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। उन्होंने अल्टीमेटम दिया है कि यदि 26 सितंबर तक बंद किए गए सभी 35 रूटों को बहाल नहीं किया गया, तो करसोग में एक बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा। 26 सितंबर को प्रभावित जनता को साथ लेकर सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक चक्का जाम किया जाएगा।
एचआरटीसी का तर्क, निजी ऑप्रेटर भी बसें चलाने में असमर्थ
दूसरी ओर, रूट बंद होने के मामले में एचआरटीसी प्रबंधन की दलील अलग है। एचआरटीसी करसोग के आरएम ने बताया कि जो रूट बंद हुए हैं, वे आर्थिक रूप से घाटे में चल रहे थे। सरकार की नीति के तहत ऐसे कुछ रूट निजी बस ऑप्रेटरों को सौंपे गए थे, लेकिन अब निजी ऑप्रेटरों ने भी इन रूटों पर बसें चलाने में असमर्थता जता दी है। इसी तकनीकी समस्या के कारण कई क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था ठप हुई है। अब सबकी नजरें 26 सितम्बर की समयसीमा पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि परिवहन विभाग और प्रशासन समय रहते इस संकट का कोई स्थायी समाधान निकाल पाते हैं, या करसोग को एक बड़े चक्का जाम का सामना करना पड़ेगा।
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