Sirmour: सुबह तक गूंज रही थी मासूमों की हंसी, शाम होते-होते सूना हो गया घर
punjabkesari.in Thursday, May 07, 2026 - 10:05 PM (IST)
नौहराधार (नाहन) (आशु वर्मा): नौहराधार तहसील के देवामानल गांव में गुरुवार को जो दर्दनाक हादसा हुआ, उसने सभी को झकझोर कर रख दिया। सुबह तक जिस घर के आंगन में 2 मासूम भाइयों की शरारतें और चहल-पहल थी, वहीं कुछ ही घंटों बाद उसी घर में मातम छा गया। मां की आंखों के सामने उसके दोनों बेटे हमेशा के लिए खामोश हो गए, जबकि पिता के हाथों से एक साथ दोनों बच्चों का सहारा छिन गया। हर आंख नम थी और हर जुबान पर बस एक ही सवाल था कि आखिर भगवान ने इतने छोटे बच्चों के साथ ऐसा क्यों किया। दोनों मासूम बच्चों की खड्ड में डूबने से हुई मौत ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया है।
स्थानीय निवासी विजय सिंह पुंडीर ने बताया कि हादसा गुरुवार सुबह करीब 11 बजे पेश आया। प्रवीण कुमार और ललिता देवी के केवल 2 ही बच्चे थे। इनमें 8 वर्षीय आयन और 9 वर्षीय अभिनव है। दोनों बच्चों की शरारतों से घर के आंगन में हमेशा रौनक रहती थी। सुबह तक दोनों पोते दादा-दादी के आसपास खेल रहे थे। अब बुजुर्ग दादा-दादी की आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। नौहराधार तहसीलदार विनोद कुमार ने बताया कि दोनों बच्चों के परिजनों को प्रशासन की ओर से 25-25 हजार रुपए की फौरी राहत प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि इस दुखद हादसे के बाद प्रशासन पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है।
पिता बकरियों के पीछे गए, उधर उजड़ गई दुनिया
विजय सिंह ने बताया कि दोनों बच्चे सुबह पिता प्रवीण कुमार के साथ पशु चराने गए थे। इसी दौरान कुछ बकरियां दूर चली गईं, जिन्हें संभालने के लिए पिता वहां से करीब 300 मीटर दूर चले गए। जब वह वापस लौटे तो दोनों बच्चे वहां मौजूद नहीं थे। जब खड्ड की तरफ नजर गई तो दोनों बच्चे पानी में अचेत अवस्था में दिखाई दिए। ग्रामीणों की मदद से दोनों बच्चों को बाहर निकाला गया।
जान की भी परवाह किए बिना भाई को बचाने कूद पड़ा
मार्मिक बात यह रही कि अभिनव बोलने और सुनने में असमर्थ था लेकिन बेहद समझदार और संवेदनशील था। लोगों के अनुसार दोनों भाइयों में बेहद गहरा लगाव था। बड़ा भाई हमेशा छोटे भाई का ध्यान रखता था। गुरुवार को भी उसने वही किया। भाई को बचाने के लिए अपनी जान की भी परवाह नहीं की, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और दोनों भाई हमेशा-हमेशा के लिए दुनिया को अलविदा कह गए। प्रवीण कुमार पेशे से किसान हैं और पूरा परिवार इन दोनों बच्चों के इर्द-गिर्द ही घूमता था। अस्पताल में बच्चों को मृत घोषित किए जाने के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव की महिलाएं और रिश्तेदार परिवार को संभालते नजर आए, लेकिन हर आंख नम थी। जिसने भी परिजनों की हालत देखी, वह खुद को रोक नहीं सका।
अंतिम विदाई ने रुला दिया
राजगढ़ सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद दोनों बच्चों के शव गांव लाए गए। शाम के समय जब दोनों भाइयों को अंतिम विदाई दी गई तो गांव का माहौल गमगीन हो गया। नम आंखों के बीच दोनों को धरती मां की गोद में सुलाया गया। इस दौरान वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं। जिसने भी यह मंजर देखा, वह भीतर तक टूट गया।

