कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार के मुद्दे पर पक्ष-विपक्ष में तीखी नोकझोंक, सीएम सुक्खू ने किया बड़ा ऐलान

punjabkesari.in Thursday, Apr 02, 2026 - 04:28 PM (IST)

शिमला: कांगड़ा के गगल हवाई अड्डे के 3,500 करोड़ रुपये के महत्वाकांक्षी विस्तार प्रोजेक्ट पर सदन में जब चर्चा शुरू हुई, तो सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के साथ-साथ ठहाके भी गूंजे।

मुआवजे और हक पर सरकार का रुख

चर्चा की शुरुआत भाजपा विधायक पवन काजल के सवाल से हुई। उन्होंने उन 80-90 परिवारों का मुद्दा उठाया जो दशकों से पंचायत द्वारा आवंटित भूमि पर बसे हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या इन बेघर होने वाले परिवारों को भी निजी भूमि स्वामियों के बराबर ही हक और मुआवजा मिलेगा?

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकार इस प्रोजेक्ट के लिए अब तक 1,960 करोड़ रुपये जारी कर चुकी है। रनवे की लंबाई 1,376 मीटर से बढ़ाकर 3,110 मीटर की जाएगी। विस्थापन का शिकार होने वाले हर परिवार (चाहे वे भूमि मालिक हों या कब्जेदार) को भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत उचित मुआवजा दिया जाएगा। राशन कार्ड और परिवार रजिस्टर के आधार पर पुनर्वास की नीति तय की जाएगी।

हवाई कनेक्टिविटी और बंद पड़ी उड़ानें

विपक्ष ने कनेक्टिविटी के मुद्दे पर सरकार को घेरा। भाजपा विधायक विपिन सिंह परमार ने सवाल किया कि पिछले कई महीनों से शिमला-धर्मशाला के बीच हवाई सेवा क्यों ठप है? उन्होंने 'उड़ान' योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता (VGF) पर स्पष्टीकरण मांगा।

जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था, लेकिन ऑपरेटरों की विफलता के कारण सेवाएं बाधित हुईं। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि जून तक चंबा, पालमपुर और हमीरपुर में हेलीपोर्ट शुरू हो जाएंगे, जिससे क्षेत्रीय संपर्क बेहतर होगा।

जब सदन में गूंजे ठहाके: "बीपी की दवा मैं भी खाता हूँ"

बहस के दौरान एक समय ऐसा आया जब पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बजट और हुडको (HUDCO) से लिए गए कर्ज पर सवाल उठाने की कोशिश की। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने नियमों का हवाला देते हुए उन्हें बीच में बोलने से रोक दिया, जिससे सदन में तनाव बढ़ गया।

तनाव को कम करते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने चुटीले अंदाज में जयराम ठाकुर से कहा, "आप इतना गुस्सा न करें, ब्लड प्रेशर की दवा तो मैं भी खाता हूँ। हमें शांत होकर चर्चा करनी चाहिए।" मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी पर पूरे सदन में हंसी की लहर दौड़ गई और कुछ देर के लिए कड़वाहट कम हो गई।

स्थानीय चिंताएं और भविष्य की रूपरेखा

कांग्रेस विधायक केवल सिंह पठानिया और सुधीर शर्मा ने भी अपने क्षेत्र के लोगों की पैरवी की। उन्होंने विस्थापित होने वाले व्यापारियों और परिवारों के लिए एक ठोस हाउसिंग पॉलिसी की मांग की। सरकार ने आश्वासन दिया कि इस साल के अंत तक जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी और किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।


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Content Editor

Jyoti M

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