हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में बिना निमंत्रण वाले देवताओं को नहीं मिलेंगी विशेष सुविधाएं
punjabkesari.in Saturday, Oct 17, 2026 - 12:19 PM (IST)
शिमला (मनोहर): हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में देवी-देवताओं को दिए जाने वाले निमंत्रण और सुविधाओं को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने देवता 'बंशीरा महाराज सिधवां' को उत्सव में विशेष निमंत्रण और सरकारी सुविधाएं प्रदान करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है।
'घरेलू देवता' को नहीं है विशेष सुविधा का कानूनी अधिकार
न्यायाधीश संदीप शर्मा की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि याचिकाकर्त्ता देवता को एक ‘घरेलू देवता’ (व्यक्तिगत देवता) माना जाएगा। अदालत ने कुल्लू के डीसी द्वारा 10 जनवरी, 2025 को जारी किए गए आदेश को वैध ठहराते हुए कहा कि प्रशासन की ओर से रहने, टैंट और बैठने की विशेष सुविधाएं केवल उन्हीं देवताओं को दी जाती हैं, जिनका व्यापक ऐतिहासिक महत्व है और जो पंजीकृत हैं। बिना निमंत्रण वाले देवताओं को यह सुविधाएं पाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
राजस्व रिकॉर्ड (वाजिब-उल-अर्ज) में नहीं मिला कोई इतिहास
सुनवाई के दौरान पेश किए गए रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट से यह तथ्य सामने आया कि देवता वर्ष 1990 में आपसी मतभेद के चलते मूल देवता बंशीरा से अलग होकर बने थे। जहां मूल देवता का रथ 2007 से कुल्लू दशहरा में विधिवत शामिल हो रहा है, वहीं याचिकाकर्त्ता का रथ बाद में कुछ समर्थकों द्वारा तैयार किया गया था। कोर्ट ने पाया कि राजस्व दस्तावेजों (वाजिब-उल-अर्ज) में भी इस नए देवता का कोई उल्लेख या दर्ज इतिहास नहीं है।
व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन का तर्क स्वीकार
हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन और दशहरा उत्सव समिति की इस दलील को भी स्वीकार किया कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन में स्थान और बजट की भारी कमी रहती है। अदालत ने माना कि यदि जिले के सभी घरेलू या व्यक्तिगत देवताओं को निमंत्रण और सुविधाएं दी जाने लगीं, तो दशहरा उत्सव की व्यवस्था को संभालना पूरी तरह असंभव हो जाएगा।
बिना निमंत्रण वाले देवताओं के लिए 'नेहरू पार्क' में व्यवस्था
अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना निमंत्रण के आने वाले देवताओं के लिए प्रशासन ने 'नेहरू पार्क' (नेहरू ग्राऊंड) में रुकने की जगह तय की है। ऐसे देवता वहां आ सकते हैं, लेकिन वे उत्सव समिति से मुख्य मैदान में जगह आबंटित करने या टैंट-गद्दे जैसी किसी भी प्रकार की सरकारी सुविधा की मांग नहीं कर सकते।
'कारदार संघ' के पास रहेगा अंतिम विशेषाधिकार
अपने फैसले के अंत में हाईकोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि कुल्लू दशहरा में भविष्य में किसी भी नए देवता को बुलाने या न बुलाने की सिफारिश करने का अंतिम विशेषाधिकार ‘कुल्लू जिला देवता कारदार संघ’ के पास ही सुरक्षित रहेगा। प्रशासन सीधे तौर पर इस मामले में कोई फैसला नहीं ले सकता। इन्हीं ठोस आधारों पर अदालत ने उक्त याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।
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