नौकरी का झांसा देकर पंजाब से बुलाई थीं लड़कियां, फिर जबरन वेश्यावृत्ति में धकेला; हिमाचल HC ने 2 महिलाओं की जमानत याचिका की खारिज
punjabkesari.in Tuesday, Mar 17, 2026 - 03:40 PM (IST)
Shimla News: "किसी को पैसे के लिए वेश्या बनने के लिए उकसाना इंसानियत का सबसे बड़ा पतन है। यह इंसानी शरीर को महज एक वस्तु में तब्दील करने जैसा है।" यह तल्ख टिप्पणी हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस राकेश कैंथला ने मनाली में लड़कियों को वेश्यावृत्ति में धकेलने के आरोपियों की जमानत याचिका खारिज करते हुए की। अदालत ने स्पष्ट किया कि मानव तस्करी जैसे जघन्य अपराध समाज के लिए एक गंभीर खतरा हैं और इन्हें किसी भी सूरत में हल्के में नहीं लिया जा सकता।
नौकरी का झांसा देकर पंजाब से बुलाई गई थीं लड़कियां
सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपियों ने पंजाब की लड़कियों को मनाली में अच्छी नौकरी दिलाने का लालच दिया था। लेकिन जैसे ही वे मनाली पहुंचीं, उन्हें डरा-धमकाकर जबरन देह व्यापार के दलदल में धकेल दिया गया। आरोपियों के वकील ने दलील दी कि लड़कियां बालिग थीं और अपनी मर्जी से काम कर रही थीं, लेकिन अदालत ने इसे सिरे से नकारते हुए कहा कि आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाकर किसी को अनैतिक कार्य में लगाना अपराध की श्रेणी में आता है।
क्या है मामला?
यह पूरा मामला 22 दिसंबर 2025 को मनाली पुलिस द्वारा मॉल रोड और बस स्टैंड इलाके में मारे गए छापे से शुरू हुआ था। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि पर्यटन नगरी में सेक्स रैकेट सक्रिय है। पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से 'नकली ग्राहक' तैयार किए और उन्हें 5,000 रुपये के चिह्नित नोट देकर आरोपियों के पास भेजा। जैसे ही सौदा पक्का हुआ, पुलिस ने दबिश देकर संदीप कौर, संतोष, कविता खातून और अन्य को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से वही चिह्नित नोट बरामद हुए।
सरकार की सख्त दलील
राज्य सरकार की ओर से डिप्टी एडवोकेट जनरल ने अदालत को बताया कि आरोपी एक संगठित गिरोह की तरह काम कर रहे थे और वेश्यावृत्ति से होने वाली अवैध कमाई पर अपना गुजारा कर रहे थे। अदालत ने सभी सबूतों और परिस्थितियों को देखते हुए आरोपियों को जमानत देने से साफ इनकार कर दिया।

