हिमाचल सरकार का बड़ा फैसला: 7 और सरकारी स्कूलों को CBSE में किया शामिल, कुल संख्या 146 पहुंची
punjabkesari.in Friday, Apr 03, 2026 - 06:39 PM (IST)
Shimla News : हिमाचल प्रदेश सरकार ने सात और सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूलों को केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के पाठ्यक्रम में शामिल किया है। सरकार के इस कदम से शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी तथा पढ़ाई पर खर्च कम होगा। सरकार ने इसके साथ ही राज्य के सरकारी संस्थानों को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लाने की अपनी नीति को आगे बढ़ाया है।
इन जिलों में स्थित है नए स्कूल
गौरतलब है कि इस नयी बढ़ोतरी के साथ राज्य के लगभग 146 सरकारी स्कूल अब तक सीबीएसई के ढांचे में शामिल हो चुके हैं। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार नए शामिल किए गए स्कूल मंडी, कुल्लू, हमीरपुर और कांगड़ा जिलों में स्थित हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव (शिक्षा) द्वारा जारी आदेश में संबद्धता प्रक्रिया को तत्काल लागू करने का निर्देश दिया गया है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि इस विस्तार से सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ेगा और शिक्षा की गुणवत्ता में भी काफी सुधार होगा। उन्होंने कहा कि सीबीएसई प्रणाली को अपनाने से मौजूदा बुनियादी ढांचे का बेहतर उपयोग होगा, जिससे राज्य पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम होगा।इसके साथ ही अपने बच्चों के लिए बेहतर शैक्षणिक अवसर चाहने वाले अभिभावकों के लिए भी शिक्षा का खर्च कम होगा।
'CBSE का पाठ्यक्रम राज्य बोर्ड के पाठ्यक्रम से पूरी तरह अलग'
मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड प्रणाली के तहत कई मेधावी छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था क्योंकि वहां मूल्यांकन के तरीके उतने प्रतिस्पर्धी या अंक दिलाने वाले नहीं थे। उन्होंने कहा कि सीबीएसई में जाने से कक्षा 10 और 12 के छात्रों को राष्ट्रीय परीक्षण मानकों के अनुरूप तैयारी करने का मौका मिलेगा, जिससे उन्हें व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश पाने के बेहतर अवसर मिलेंगे। दूसरी ओर इस बदलाव से अभिभावकों में कुछ भ्रम भी पैदा हुआ है। कई लोगों का मानना है कि सीबीएसई का पाठ्यक्रम राज्य बोर्ड के पाठ्यक्रम से पूरी तरह अलग है। असल में सीबीएसई के तहत बोर्ड परीक्षाओं से इतर का अधिकांश पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की पाठ्यपुस्तकों पर ही आधारित है। इसके अलावा कक्षा 5, 8, 10 और 12 को छोड़कर अन्य कक्षाओं के लिए पाठ्यक्रम काफी हद तक एक जैसा ही रहता है। अधिकारियों ने बताया कि इस सुधार का उद्देश्य एक समान शैक्षणिक मानक सुनिश्चित करना, छात्रों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ाना और हिमाचल के युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध अवसरों के लिए तैयार करना है। इस प्रक्रिया में मुख्य शिक्षण सामग्री की निरंतरता को भी बनाए रखा जाएगा।

