Himachal: मंडी के कांगणीधार में बनेगा हाईटैक न्यायालय परिसर, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने रखी आधारशिला

punjabkesari.in Sunday, Mar 15, 2026 - 02:08 PM (IST)

मंडी (रजनीश): हिमाचल प्रदेश की छोटी काशी और सांस्कृतिक राजधानी के रूप में विख्यात मंडी जिले के न्यायिक इतिहास में रविवार को एक नया और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। शहर के कांगणीधार इलाके में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस नए न्यायिक न्यायालय परिसर का निर्माण होने जा रहा है। रविवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने इस भव्य न्यायालय परिसर की विधिवत आधारशिला रखी। इस ऐतिहासिक शिलान्यास समारोह में न्यायपालिका और कार्यपालिका का बेहतरीन समन्वय देखने को मिला। कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू और हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया ने विशेष रूप से मौजूद रहे।

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120 बीघा भूमि पर तैयार होगा भविष्य का ढांचा
मंडी में अदालती कामकाज के बढ़ते दबाव और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस नए परिसर की रूपरेखा तैयार की गई है। प्रशासन द्वारा इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए कांगणीधार में कुल 120 बीघा भूमि आबंटित की गई है। यह नया न्यायालय परिसर केवल अपने विशाल आकार और भव्यता का प्रतीक नहीं होगा, बल्कि इसका बुनियादी ढांचा आधुनिक वास्तुकला और भविष्य की न्याय प्रणाली की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किया जा रहा है।

7 ब्लॉक्स में बंटेगा परिसर, वकीलों के लिए होंगे 2 विशेष ब्लॉक
पूरे कॉम्प्लेक्स को सुव्यवस्थित ढंग से कुल 7 ब्लॉक्स में विभाजित किया जाएगा, ताकि कामकाज में कोई बाधा न आए। 7 में से 5 ब्लॉक पूरी तरह से न्यायिक कार्यवाही, जजों के बैठने और अदालती कामकाज के लिए समर्पित होंगे। अधिवक्ताओं की सुविधाओं का भी इस ढांचे में विशेष ध्यान रखा गया है। 2 ब्लॉक विशेष तौर पर वकीलों के बैठने के लिए (चैंबर्स) और उनके दैनिक कार्यों के लिए निर्धारित किए गए हैं, ताकि उन्हें काम करने के लिए एक बेहतर और शांत माहौल मिल सके।

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हाईटैक सुविधाओं और डिजिटल कनैक्टिविटी से होगा लैस
आने वाले समय में यह न्याय का मंदिर पूरी तरह से हाईटेक होगा। परिसर को अत्याधुनिक सुविधाओं और उन्नत डिजिटल कनैक्टिविटी से सुसज्जित किया जाएगा। स्मार्ट कोर्ट की तर्ज पर बनने वाले इस परिसर से न केवल जजों और वकीलों को काम करने में आसानी होगी, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी। तकनीक के इस्तेमाल से न्याय प्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी और दूरदराज से न्याय की आस में आने वाले आम नागरिकों के लिए न्याय सुलभ और सुगम हो जाएगा।

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Content Writer

Vijay

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