Kangra: इंदौरा में वन माफिया के हौसले बुलंद! खैर के हरे-भरे पेड़ों पर चलाया आरा, 40 मौछे बरामद

punjabkesari.in Saturday, Aug 22, 2026 - 07:36 PM (IST)

इंदौरा (राहुल राणा): नूरपुर वन मंडल के अंतर्गत इंदौरा के इंदपुर क्षेत्र में वन माफिया की सक्रियता का एक और मामला सामने आया है। यहां अवैध रूप से काटे गए खैर के हरे-भरे पेड़ों के 40 मौछे बरामद किए गए हैं। घटना के बाद पुलिस और वन विभाग ने मौके पर पहुंचकर लकड़ी को कब्जे में ले लिया है, हालांकि पुलिस की जांच प्रक्रिया पर कुछ सवाल भी खड़े हुए हैं।

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जानकारी के अनुसार जिस जगह पर खैर के काटे गए मौछे छिपाकर रखे गए थे, वहां इंदौरा पुलिस पहुंची और कार्रवाई अमल में लाई, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि पुलिस अधिकारी उस वास्तविक स्थान तक नहीं गए, जहां से पेड़ों का कटान हुआ था। पुलिस ने केवल मौछे रखने वाली जगह से रिपोर्ट तैयार की और लकड़ी वन विभाग को सौंप कर लौट गई। मामले की जांच कर रहे हैड कांस्टेबल संजीव ने बताया कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि खैर के पेड़ किसने काटे हैं। पुलिस वन विभाग के साथ मिलकर मामले की गहनता से जांच कर रही है और जल्द ही आरोपियों का पता लगा लिया जाएगा।

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इंदौरा पुलिस के लौटने के बाद वन रेंज अधिकारी (इंदौरा) अब्दुल हमीद अपनी टीम के साथ उस वास्तविक स्थान पर गए, जहां से पेड़ काटे गए थे। वहां मुआयना करने पर पाया गया कि माफिया ने कुल 7 खैर के पेड़ों पर आरा चलाया है। वन रेंज अधिकारी अब्दुल हमीद ने लकड़ी को सुपुर्दगी में लेने की पुष्टि करते हुए बताया कि कुल 7 पेड़ों के 40 मौछे बरामद हुए हैं। उन्होंने कहा कि रात के समय जंगलों में गश्त करना और निगरानी रखना थोड़ा मुश्किल रहता है, लेकिन विभाग इस मामले की पूरी गंभीरता से जांच कर रहा है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

बता दें कि नूरपुर वन मंडल में खैर के अवैध कटान का यह कोई पहला मामला नहीं है। रेंज रे, ज्वाली, इंदौरा और नूरपुर में वनकाटु लगातार सक्रिय हैं और ऐसी घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। खैर के पेड़ आर्थिक रूप से बेहद मूल्यवान होते हैं, जिसके चलते यह तस्करों के निशाने पर रहते हैं। लगातार हो रहे कटान से न केवल बेशकीमती वन संपदा लुट रही है, बल्कि पर्यावरण को भी भारी नुक्सान पहुंच रहा है। लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब देखना यह है कि पुलिस और वन विभाग मिलकर इन वन माफियाओं पर कोई ठोस लगाम लगा पाते हैं, या फिर यह मामला भी महज सवालों के घेरे में उलझ कर रह जाएगा।

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Content Writer

Vijay

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