Mandi: लोहड़ी और मकर संक्रांति काे लेकर तत्तापानी में उमड़ा आस्था का सैलाब, आज भव्य आरती और कल होगा महास्नान
punjabkesari.in Tuesday, Jan 13, 2026 - 05:40 PM (IST)
करसोग (धर्मवीर गौतम): देवभूमि हिमाचल के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल तत्तापानी में लोहड़ी और मकर संक्रांति के पावन अवसर पर आस्था और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। सतलुज नदी के तट पर आयोजित होने वाले 2 दिवसीय जिला स्तरीय मेले के लिए पूरा क्षेत्र सजकर तैयार है। धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को संजोए इस ऐतिहासिक मेले में भाग लेने के लिए श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया है।
आज सतलुज आरती से होगी शुरूआत
मेले के पहले दिन यानी आज शाम को सतलुज नदी की भव्य महाआरती का आयोजन किया जाएगा, जो इस उत्सव का मुख्य आकर्षण होगा। आरती के अलौकिक दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश वन विकास निगम के उपाध्यक्ष केहर सिंह खाची बतौर मुख्य अतिथि शाम 6 बजे कार्यक्रम में शिरकत करेंगे और उत्सव की गरिमा बढ़ाएंगे।
मकर संक्रांति पर पहुंचेंगे कैबिनेट मंत्री
मेले के दूसरे दिन 14 जनवरी को मकर संक्रांति का मुख्य उत्सव मनाया जाएगा। इस दिन प्रातः काल कन्या पूजन और तुलादान जैसे विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। प्रदेश सरकार के राजस्व, बागवानी एवं जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी दोपहर डेढ़ बजे मुख्यातिथि के रूप में मेले में शामिल होंगे।
तुलादान और पवित्र स्नान का विशेष महत्व
तत्तापानी में मकर संक्रांति पर गर्म जल के कुंडों में स्नान और तुलादान का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन ब्रह्म मुहूर्त में यहां स्नान करने से पापों का नाश होता है। श्रद्धालु अपने वजन के बराबर अनाज (तुलादान) दान करते हैं। इस दौरान खिचड़ी, चावल, माश, उड़द की दाल और ऊनी वस्त्रों का दान करने की पुरानी परंपरा है, जिसे निभाने के लिए दूर-दूर से लोग यहां पहुंचते हैं।
सुरक्षा और सुविधा के पुख्ता इंतजाम
मेले में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। ग्राम पंचायत तत्तापानी के उप-प्रधान वीरेंद्र कपिल ने जानकारी दी कि मेले को भव्य और सफल बनाने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि किसी को असुविधा न हो। मकर संक्रांति से एक दिन पूर्व ही तत्तापानी में आस्था का सैलाब उमड़ने लगा है, जो न केवल धार्मिक परंपरा को जीवित रखता है, बल्कि क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को भी प्रदर्शित करता है।

