Kangra: सरकारी स्टोर में 300 से ज्यादा मुफ्त दवाएं उपलब्ध, फिर भी मरीजों को खरीदनी पड़ रहीं महंगी दवाएं
punjabkesari.in Saturday, May 23, 2026 - 07:43 PM (IST)
धर्मशाला (सुनील): जोनल अस्पताल धर्मशाला में कुछ डॉक्टरों के रवैये के कारण सरकार की मुफ्त इलाज की योजनाओं का पूरा लाभ आम जनता को नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल के सरकारी स्टोर में मरीजों के लिए 300 से ज्यादा तरह की दवाइयां मुफ्त उपलब्ध हैं। इसके बावजूद डॉक्टरों द्वारा मरीजों को बाहर से महंगी दवाइयां लिखी जा रही हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि डॉक्टर मरीजों से मुंह से कुछ नहीं कहते, बल्कि चुपचाप उनकी पर्ची पर ऐसी दवाइयां लिख देते हैं जो अस्पताल के अंदर मिलती ही नहीं हैं। इलाज के लिए आने वाले गरीब और जरूरतमंद मरीजों को जब दवा खिड़की से पता चलता है कि यह दवा अंदर नहीं मिलेगी, तो उनके पास बाहर से महंगी दवाइयां खरीदने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता। दूर-दूर से सरकारी अस्पताल में मुफ्त इलाज की उम्मीद लेकर आ रहे मरीजों को इस वजह से भारी आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में इलाज करवाने आए अलग-अलग मरीजों और उनके परिवारों ने रोष जताते हुए बताया कि डॉक्टरों के इस रवैये के कारण सरकारी दावों की हवा निकल रही है और मरीजों की जेब खाली हो रही है।
पैर दर्द का इलाज करवाने आई युवती की पर्ची पर लिखी 1500 की दवा
अस्पताल में इलाज करवाने आई एक युवती ने बताया कि उनके पैर में पिछले कुछ दिनों से काफी दिक्कत थी। वह इलाज के लिए अस्पताल की ऑर्थो ओपीडी में गई थी। डॉक्टर ने पैर की जांच तो की लेकिन बिना कुछ बोले पर्ची पर बाहर की दवाइयां लिख दीं। युवती ने बताया कि जब वह बाहर से दवा लेने गई तो बिल करीब 1500 रुपए बना। इतनी महंगी दवाइयां खरीदना उनके जैसे मध्यमवर्गीय परिवार के लिए बेहद मुश्किल है।
सिर्फ जुकाम होने पर भी लिख दी बाहर की दवा
वहीं, ओपीडी के बाहर मिले एक अन्य युवक ने बताया कि उन्हें पिछले 2 दिनों से सिर्फ सामान्य सर्दी-जुकाम था। वह पर्ची बनवाकर जनरल ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने गए। युवक का कहना है कि जुकाम जैसी आम बीमारी की दवाइयां भी डॉक्टर ने बाहर की लिख दीं, जिसके लिए उन्हें अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़े। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सर्दी-जुकाम की दवा भी बाहर की पर्ची पर लिखी जाएगी तो सरकारी अस्पताल आने का क्या फायदा।
मानसिक तनाव और काऊंसलिंग के लिए आई युवती को लिख दी 1200 की दवा
अस्पताल के मनोरोग विभाग में आई एक अन्य युवती ने बताया कि मानसिक तनाव और काऊंसलिंग के लिए वह डॉक्टर के पास गई थी। डॉक्टर ने पर्ची पर कुछ ऐसी दवाइयां लिख दीं जो बाहर से मिलनी थीं। जब उन्होंने मैडीकल स्टोर से वो दवाइयां खरीदीं, तो उनका बिल 1200 रुपए आया।
मामले की पूरी जांच होगी
एमएस जोनल अस्पताल धर्मशाला डॉ. अनुराधा शर्मा का कहना है कि अस्पताल में इस समय 300 से अधिक प्रकार की जरूरी दवाइयां पूरी तरह उपलब्ध हैं। डॉक्टरों को सख्त निर्देश हैं कि वे केवल अस्पताल में मौजूद दवाइयां ही लिखें। जो मामले सामने आए हैं, उनकी पूरी जांच की जाएगी। संबंधित डॉक्टरों से जवाब-तलब किया जाएगा और उन्हें सख्त चेतावनी दी जाएगी कि अगर भविष्य में किसी भी मरीज को बिना वजह बाहर की दवा लिखी तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

