Himachal: देवताओं से युद्ध में डायनों की जीत, भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं के मिले संकेत!
punjabkesari.in Wednesday, Sep 16, 2026 - 11:43 AM (IST)
मंडी (ब्यूरो): मंडी जिले के तुंगल क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ माता बगलामुखी मंदिर (सेहली) में वार्षिक जाग का आयोजन किया गया। इस धार्मिक अनुष्ठान में गूर (देवता के प्रतिनिधि) के माध्यम से देववाणी हुई, जिसमें प्रकृति और देव परंपराओं (देवनीति) के साथ हो रही छेड़छाड़ को लेकर मानव जाति को गंभीर चेतावनी दी गई है। देववाणी के अनुसार इस वर्ष देवताओं और डायनों के बीच हुए युद्ध में डायनों की जीत हुई है, जिसे आगामी समय में प्राकृतिक आपदाओं के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
3 बार देवता और 4 बार डायनें विजयी रहीं
मंदिर के पुजारी अमरजीत शर्मा ने बताया कि सोमवार रात ठीक 12 बजे माता की विशेष पूजा-अर्चना के साथ जाग की शुरुआत हुई। इस दौरान देववाणी के जरिए देवताओं और डायनों के मध्य हुए पौराणिक युद्ध का वृत्तांत सुनाया गया। गूर ने बताया कि देवता आषाढ़ माह की शैण देवी एकादशी को युद्ध के लिए रवाना हुए थे और इनका निर्णायक युद्ध भाद्रपद माह में संपन्न हुआ। दोनों शक्तियों के बीच कुल 7 युद्ध हुए, जिनमें 3 बार देवता और 4 बार डायनें विजयी रहीं। पहला युद्ध समुद्र के टापू पर लड़ा गया, जबकि अंतिम और निर्णायक युद्ध मंडी जिले के घोघरधार नामक स्थान पर हुआ। अंतिम युद्ध में डायनें शिख-पाथा (एक प्रकार का पारम्परिक प्रतीक) लेकर चली गईं, जिसके चलते इस वर्ष उन्हें विजयी माना गया है।
धार्मिक स्थलों के व्यवसायीकरण और प्रकृति से खिलवाड़ पर चिंता
जाग के दौरान माता ने गूर के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया कि मनुष्य निरंतर प्रकृति और देवनीति के साथ खिलवाड़ कर रहा है। देव स्थानों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो देव परंपराओं के सख्त विरुद्ध है। देववाणी में स्पष्ट किया गया कि देवता शांत, स्वच्छ और पवित्र स्थानों पर ही वास करते हैं। यदि मनुष्य अब भी अपनी गलतियों से नहीं चेता तो भविष्य में और भी भयावह परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। हालांकि, माता ने अपने सच्चे भक्तों को आश्वस्त किया है कि वह उन्हें इन विपत्तियों से बचाने के लिए सुरक्षा कवच प्रदान करेंगी।
आगामी वर्ष के लिए की गईं प्रमुख भविष्यवाणियां
अंतिम युद्ध में डायनों की जीत को आधार मानते हुए गूर ने आगामी समय के लिए निम्नलिखित भविष्यवाणियां की हैं।
प्राकृतिक आपदाओं का अंदेशा: नकारात्मक शक्तियों की जीत के कारण आने वाले समय में क्षेत्र और आसपास के इलाकों में बाढ़, भूकंप और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं का प्रकोप बढ़ सकता है।
जान-माल और स्वास्थ्य पर प्रभाव: समाज में असामयिक दुर्घटनाओं, गंभीर व नई बीमारियों के फैलने और जीव-जंतुओं की अल्प आयु में मृत्यु जैसी अप्रिय घटनाओं में वृद्धि की आशंका जताई गई है।
कृषि पर मिला-जुला असर: फसलों के दृष्टिकोण से आगामी समय का प्रभाव मिश्रित रहेगा। कुछ क्षेत्रों में अप्रत्याशित रूप से भरपूर पैदावार होगी, जबकि कई अन्य क्षेत्रों में मौसम की मार और प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
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