ITS Officer ने जान देकर चुकाई एम्बुलैंस में वैंटीलेटर न होने की कीमत, पढ़ें क्या है मामला

6/9/2019 9:00:15 PM

शिमला: प्रदेश में चलाई जा रही एम्बुलैंस सेवा को लेकर वैसे तो सरकार एक से बढ़कर एक दावे करती है लेकिन यहां स्थिति कुछ और ही बयां कर रही है। हैरानी की बात है कि एम्बुलैंस में अभी तक वैंटीलेटर ही नहीं लग पाए हैं, जिसके चलते मरीजों की जान तक जा रही है। इसका ताजा उदाहरण बीते शनिवार की रात को आई.जी.एम.सी. में तब देखने को मिला जब एम्बुलैंस में वैंटीलेटर न होने से एक इंडियन टैलीकॉम सर्विसिज (आई.टी.एस.) ऑफिसर की मौत हो गई।

स्वाइन फ्लू से ग्रसित था ऑफिसर 

आई.टी.एस. ऑफिसर सर्वेंदर सिंह को 2 दिन पहले आई.जी.एम.सी. में भर्ती किया गया था। वह स्वाइन फ्लू से ग्रसित बताए जा रहा था लेकिन 7 जून को उसे अचानक सांस लेने में दिक्कत हुई, ऐसे में उसे आई.जी.एम.सी. में भर्ती किया गया। चिकित्सक ने उसके नॉर्मल टैस्ट तो लिए लेकिन स्वाइन फ्लू का कोई टैस्ट नहीं लिया। जब शनिवार को मरीज की हालत गंभीर हुई तो चिकित्सक ने आई.जी.एम.सी. से उसे चंडीगढ़ के निजी अस्पताल के लिए रैफर किया।

निजी एम्बुलैंस के पहुंचने से पहले ऑफिसर ने तोड़ा दम

हुआ यह कि जब 108 एम्बुलैंस में मरीज को ले जाने के लिए संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि एम्बुलैंस में वैंटीलेटर नहीं लगा हुआ है, ऐसे में मरीज को चंडीगढ़ नहीं पहुंचाया जा सकता है। सिर्फ एक ही एम्बुलैंस में वैंटीलेटर लगा हुआ है और वह एम्बुलैंस मरीज को लेकर पी.जी.आई. गई है। तभी चिकित्सक की सहायता लेकर उक्त मरीज के परिजनों और रिश्तेदारों ने निजी अस्पताल से एम्बुलैंस मंगवाई। अस्पताल से तुरंत एम्बुलैंस तो आ गई थी लेकिन एम्बुलैंस सोलन तक ही पहुंच पाई, उतने में मरीज की आई.जी.एम.सी. में मौत हो गई। यह घटना बीती रात को 9 बजे के आसपास सामने आई।

दिल्ली का रहने वाला था आई.टी.एस. ऑफिसर

आई.टी.एस. ऑफिसर मूल रूप से दिल्ली का रहने वाला था और छोटा शिमला में डिप्टी डायरैक्टर जनरल (डी.डी.जी.) के पद पर तैनात था। हद तो यह है कि प्रदेश सरकार ने प्रदेश को 46 नई एम्बुलैंस दी हैं लेकिन उनमें भी वैंटीलेटर नहीं लगे हुए हैं। प्रदेश में वर्तमान में 200 एम्बुलैंस चलाई जा रही हैं। जिस प्रकार से मरीजों की मौतें हो रही हैं उससे तो साफ जाहिर है कि प्रदेश के मरीजों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

क्या बोले 108 एम्बुलैंस के प्रोग्राम ऑफिसर

108 एम्बुलैंस के प्रोग्राम ऑफिसर आकाशदीप ने कहा कि यह मामला हमारे ध्यान में आया था। हमारे पास वैंटीलेटर वाली एक ही एम्बुलैंस थी। वह मरीज को लेकर पी.जी.आई. गई थी, ऐसे में हमारे पास वैंटीलेटर वाली एम्बुलैंस नहीं थी। एक और एम्बुलैंस में वैंटीलेटर लगा हुआ है लेकिन वह खराब हो गया था और उसे रिपेयर के लिए दिया गया है। हमने एम्बुलैंस सोलन से उपलब्ध करवा दी थी लेकिन तब तक मरीज के परिजनों ने एम्बुलैंस को निजी अस्पताल से मंगवा लिया था।


Vijay

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