भ्रष्टाचार और माफिया के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई, आने वाले समय में होंगे और भी खुलासे : सीएम सुक्खू
punjabkesari.in Friday, Mar 27, 2026 - 09:31 PM (IST)
शिमला (भूपिन्द्र): मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार और माइनिंग माफिया के खिलाफ सख्ती के साथ और तेजी से कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रदेश की संपदा को बचाने का संकल्प लिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि हम आने वाले समय में और भी खुलासे करेंगे। सीएम ने कहा कि उनका किसी के साथ व्यक्तिगत द्वेष नहीं है। जो भी माफिया में लिप्त होंगे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह बात उन्होंने विपक्ष की ओर से पुलिस एवं संबद्ध संगठन पर लाए कटौती प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कही। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष ने विरोध किया तथा विपक्षी सदस्य अपनी-अपनी सीटों पर खड़े होकर शोर-शराबा करने लगे। हालांकि इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने सदस्यों को शांत करने का प्रयास भी किया।
विपक्ष के विरोध के बीच सदन में लाया गया यह कटौती प्रस्ताव ध्वनिमत से गिर गया। मुख्यमंत्री ने विधानसभा में ऐलान किया कि प्रदेश में अपराध और अपराधियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। हिमाचल की संपदा को बचाने के लिए सरकार कड़े प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि कई बड़े खुलासे आने वाले समय में होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में अपराधों पर पूरी तरह से नियंत्रण है। कानून व्यवस्था की स्थिति को ठीक बताते हुए सीएम ने कटौती प्रस्ताव वापस लेने का आग्रह किया, लेकिन इस पर भाजपा ने अपना विरोध दर्ज किया। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने वोट करवाया और सत्तापक्ष के समर्थन से कटौती प्रस्ताव गिर गया।
बनूरी भूमि घोटाले पर एफआईआर दर्ज की जाए : विपिन परमार
इससे पहले कटौती प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए विधायक विपिन सिंह परमार ने पालमपुर के बनूरी महाल में जमीन घोटाले का मामला उठाया तथा कहा कि राजस्व विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों तथा प्राॅपर्टी डीलरों की मिलीभगत से जमीन व मकान को किसी और के नाम से करवा दिया। इसमें गलत गवाही भी दिलाई गई। आलम यह है कि पालमपुर के एक राजस्व अधिकारी ने नगर निगम आयुक्त को आदेश जारी कर विवादित जमीन की मालिक के मृत्यु का प्रमाण पत्र जारी करने के आदेश दिए, जबकि उनकी मौत वहां पर नहीं हुई थी, जिसकी स्थानीय लंबरदार ने गवाही दी थी। उन्होंने इस मामले में सभी संलिप्त लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की।
लगातार बिगड़ रही कानून व्यवस्था : बिक्रम ठाकुर
कटौती प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए विधायक बिक्रम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था लगातार बिगड़ रही है। उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस वो काम नहीं कर रही जो जिस तरह के काम उसे करने चाहिए। उन्होंने सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि व्यवस्था तब ठीक होती है जब मुखिया ठीक हो। उन्होंने कहा कि फ्लैगशिप कार्यक्रम के माध्यम से राजनीति की जा रही है।
नशे के खिलाफ सख्ती से कदम उठाने की आवश्यकता : सतपाल सत्ती
चर्चा में भाग लेते हुए सतपाल सिंह सत्ती ने कहा कि ऊना जिले में कानून व्यवस्था का मामला उठाया तथा कहा कि जब अवैध कारोबार करने वाले पकड़े नहीं जाते तथा वह अमीर बन रहे हैं तो युवा भी उनको देखकर इसमें संलिप्त हो रहे हैं। नशे के खिलाफ सख्ती से कदम उठाने की आवश्यकता है। सीमावर्ती क्षेत्रों में लगे अधिकारियों की संपत्ति की जांच की जानी चाहिए।
क्या डीजीपी की पोस्ट सबलैट हो सकती है? : रणधीर
विधायक रणधीर शर्मा ने कहा कि जिस प्रदेश का पुलिस प्रमुख ही नियमित न हो तो उस प्रदेश की कानून व्यवस्था कैसी होगी। अब उस कार्यवाहक पुलिस प्रमुख को छुट्टी भेज दिया तथा दूसरे को कार्यवाहक लगाया है। क्या डीजीपी की पोस्ट सबलैट हो सकती है? उससे क्या हम कानून व्यवस्था की उम्मीद कर सकते हैं?
सरकार की नीतियों ने पुलिस अधिकारियों को बना दिया पंगु : त्रिलोक जम्वाल
चर्चा में भाग लेते हुए त्रिलोक जम्वाल ने कहा कि डीजीपी की स्थायी नियुक्ति नहीं करने के पीछे सरकार की मंशा क्या है। उन्होंने कहा कि विमल नेगी मामले में किस तरह से पुलिस की धज्जियां उड़ी का भी स्मरण किया जाना चाहिए। सरकार की नीतियों ने पुलिस अधिकारियों को पंगु बना दिया है।
पुलिस को सशक्त करने के लिए दिया जाना चाहिए अधिक बजट : आशीष शर्मा
विधायक आशीष शर्मा ने कहा कि बजट में पुलिस को 3.3 फीसदी हिस्सा दिया है। उन्हें सशक्त करने के लिए अधिक बजट दिया जाना चाहिए। पुलिस को सुविधाएं नहीं देंगे तो वह कुछ नहीं कर पाएगी। मुझे अदालतों व पुलिस थानों के चक्कर लगाते लंबा समय हो गया है, इससे संसाधन बर्बाद हो रहे हैं।
न्यायालय में विचाराधीन मामलों पर नहीं होगी सदन में चर्चा : अध्यक्ष
विधायक आशीष शर्मा ने सदन में जब खुद से जुड़े एक मामले का उल्लेख किया, तो मुख्यमंत्री ने इस पर आपत्ति जताई तथा कहा कि न्यायालय में विचाराधीन मामलों पर सदन में चर्चा नहीं होनी चाहिए। जबकि विपक्ष ने उनका विरोध किया। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने वोट करवाया, जिसका सत्ता ने समर्थन किया। ऐसे में साफ हो गया कि सदन में ऐसे कानूनी मामलों पर चर्चा नहीं होगी जो पहले से अदालत में चल रहे हैं। अध्यक्ष नियमों के तहत अपनी रूलिंग दे सकते हैं। इस पर रणधीर शर्मा ने कहा कि चर्चा तो हो सकती है। वहीं विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने कहा कि कटौती प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान स्वभाविक रूप से हत्या, दुष्कर्म, माफियाराज पर चर्चा होनी है। स्वभाविक रूप से मामले अदालत में होंगे तो यहां पर चर्चा किस विषय पर होगी। एक सदस्य को पुलिस कई घंटों तक थाने में बिठाती है तो क्या उस पर चर्चा नहीं हो सकती। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि ऐसे मामलों को चर्चा में नहीं लाया जा सकता है।

