SIR विवाद : हिमाचल BJP की कांग्रेस को चुनौती- योग्य मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाने का दें सबूत
punjabkesari.in Sunday, Oct 18, 2026 - 11:07 AM (IST)
Shimla News : हिमाचल प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शनिवार को कांग्रेस को देश भर में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान योग्य मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जाने के आरोपों का सबूत देने की चुनौती दी।
विधायक ने लगाया ये आरोप
हिमाचल भाजपा के मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक राकेश जमवाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अनियमितताओं के ठोस सबूत पेश करने के बजाय इस देशव्यापी प्रक्रिया को लेकर लोगों के बीच भ्रम फैला रही है। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रियाएं बेहद संवेदनशील होती हैं और इन पर राजनीतिक बयानबाजी के बजाय तथ्यों, आंकड़ों और सबूतों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए। प्रारूप सूची से नाम छूट जाने का मतलब यह नहीं है कि मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की सटीकता सुनिश्चित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। एक अर्थशास्त्री और लेखक के विश्लेषण का हवाला देते हुए जमवाल ने कहा कि एसआईआर से जुड़े आंकड़ों और दावों की बारीकी से जांच करने की जरूरत है। उन्होंने एक अनुमान का हवाला दिया कि 2024 में लगभग 7.3 करोड़ युवा मतदाता पंजीकृत नहीं हुए थे। उन्होंने तर्क दिया कि इस प्रक्रिया का आकलन करते समय मतदाता पंजीकरण में मौजूद इन खामियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
नागरिकों को मताधिकार से कर दिया गया वंचित
जमवाल ने कहा कि प्रारूप मतदाता सूची से लगभग 13 करोड़ नामों के चिह्नित होने या गायब होने के दावों का सीधा मतलब यह नहीं निकाला जा सकता कि उतने ही नागरिकों को मताधिकार से वंचित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रारूप मतदाता सूची और अंतिम मतदाता सूची में अंतर होता है तथा दावे, आपत्तियां, दस्तावेजों का सत्यापन और सुधार तय प्रक्रिया का ही हिस्सा हैं। उन्होंने कांग्रेस से यह स्पष्ट करने को कहा कि वास्तव में कितने योग्य मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाये गये हैं, इन आरोपों का क्या आधार है और दर्ज शिकायतों पर क्या कारर्वाई की गयी है। उन्होंने कहा कि किसी भी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया जाना गंभीर विषय है और तय प्रक्रिया के अनुसार इसकी निष्पक्ष जांच एवं सुधार होना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस पर चुनाव आयोग, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और मतदाता सूचियों को लेकर बार-बार राजनीतिक विवाद खड़े करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के पास संवैधानिक संस्थाओं के फैसलों पर सवाल उठाने का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन अपने आरोपों को ठोस सबूतों के साथ साबित करना भी उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि भाजपा हर योग्य नागरिक को मतदाता सूची में शामिल करने और अपात्र, मृत या दोहरे प्रविष्टियों वाले नामों की गलतियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत सुधारने के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि पुनरीक्षण की यह प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही के साथ आयोजित की जानी चाहिए।
उन्होंने कांग्रेस से अपनी आपत्तियों के तथ्यात्मक आधार जनता के सामने रखने का आग्रह करते हुए कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए चुनावी प्रक्रियाओं में विश्वास, संस्थागत जवाबदेही और हर पात्र मतदाता के अधिकारों की रक्षा बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को जनता को सही जानकारी देने के साथ ही प्रक्रिया को लेकर आशंकाएं पैदा करने के बजाय चुनाव सुधारों पर रचनात्मक चर्चा को प्राथमिकता देनी चाहिए।

