Shimla: राज्य में 1,968 स्कूल कलस्टर बनाए गए : मुख्यमंत्री
punjabkesari.in Sunday, Jan 04, 2026 - 05:27 PM (IST)
शिमला (ब्यूरो): सरकार ने ‘स्कूल कलस्टर प्रणाली’ को पूरे राज्य में औपचारिक रूप से लागू कर दिया है। सरकार का मानना है कि इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से अलग-थलग पड़े एकल विद्यालयों की समस्या को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस पहल के तहत प्रत्येक वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला को प्रमुख विद्यालय का दर्जा दिया गया है, जिसके अधीन आने वाले 7 से 8 उच्च, माध्यमिक और प्राथमिक विद्यालय अब संबंधित प्रमुख विद्यालय के प्रधानाचार्य के प्रशासनिक नियंत्रण में हैं। प्रधानाचार्यों को पूर्व-प्राथमिक से लेकर 12वीं कक्षा तक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य में कुल 1,968 स्कूल कलस्टर बनाए गए हैं।
इस पहल के तहत, किसी कलस्टर के अंतर्गत आने वाले स्कूल संसाधनों का सांझा उपयोग करते हैं, ताकि छोटे विद्यालयों के छात्रों की हब स्कूलों में उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं का लाभ उठा सकें। इन कलस्टर स्कूलों में आधुनिक आईसीटी प्रयोगशालाएं, पूरी तरह सुसज्जित विज्ञान प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय और बहुउद्देशीय खेल परिसर उपलब्ध हैं। सुक्खू ने कहा कि ‘इस हब-एंड-स्पोक मॉडल’ को अपनाकर, प्रदेश सरकार राज्य के हर बच्चे को संसाधनों से समृद्ध और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का प्रयास कर रही है, ताकि दूरदराज के ग्रामीण स्कूलों और बड़े शहरी संस्थानों के बीच के गुणवत्ता फासले को कम किया जा सके।
पिछली सरकार ने अंतिम 6 माह के कार्यकाल में कुल 17 प्राथमिक और 20 माध्यमिक विद्यालय खोलें
उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान बिना वैज्ञानिक योजना और पर्याप्त संसाधनों के हजारों संस्थान खोले, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ा। इसी क्रम को सुव्यवस्थित करते हुए सरकार ने कुछ स्कूलों को या तो बंद किया या अन्य स्कूलों में विलय किया है। पिछली सरकार ने राजनीतिक लाभ के लिए बिना उचित बजट प्रावधान और योजना के अपने अंतिम 6 माह के कार्यकाल में कुल 17 प्राथमिक और 20 माध्यमिक विद्यालय खोले, जिनमें छात्र संख्या 10 या उससे भी कम थी। वर्तमान सरकार ने व्यापक समीक्षा के उपरान्त 31 दिसम्बर, 2025 तक लगभग 770 प्राथमिक और माध्यमिक पाठशालाएं, जिनमें विद्यार्थियों की संख्या शून्य थी, उन्हें बंद किया। इसके अलावा, 532 प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय, जिनमें 5 से कम विद्यार्थी थे और 2-3 किलोमीटर के भीतर कोई अन्य स्कूल था, उन्हें नजदीकी स्कूलों में विलय कर दिया गया।
इसके अलावा कम नामांकन के कारण 21 वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाओं और 21 उच्च विद्यालयों का स्तर घटाया गया या उन्हें बंद कर दिया गया। कुछ स्कूलों में चार-पांच शिक्षक नियुक्त किए गए थे, जबकि विद्यार्थियों की संख्या 2 या उससे कम थी। भाजपा शासन के दौरान शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गई थी। उन्होंने अंतिम 6 महीनों में 14 सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाएं और 15 उच्च विद्यालय खोले जिनमें विद्यार्थियों का नामांकन कम था। वर्तमान सरकार ने इन स्कूलों को भी बंद किया।
स्कूलों में रिक्त पदों को आवश्यकता अनुसार भरा जा रहा
उन्होंने कहा कि स्कूलों का विलय और समायोजन मॉडल से शिक्षक और विद्यार्थी का अनुपात बेहतर और स्मार्ट क्लासरूम और प्रयोगशाला जैसी सुविधाओं तक सभी विद्यार्थियों की पहुंच सुनिश्चित होगी। अधिक शिक्षकों वाले शहरी स्कूलों से शिक्षकों को दूरदराज के इलाकों में स्थानांतरित किया गया और रिक्त पदों को आवश्यकता के अनुसार भरा जा रहा है। चुनावी गारंटी को पूरा करते हुए कक्षा पहली से ही अंग्रेजी मीडियम में पढ़ाई शुरू कर दी है, जिससे सरकारी और निजी स्कूलों के बीच का फासला कम हुआ है। हर विधानसभा क्षेत्र में आधुनिक राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूलों को चरणबद्ध तरीके से शुरू होने से विद्यार्थियों को गुणवत्तायुक्त शिक्षा सुनिश्चित होगी।

