Shimla: प्रदेश में नशे के खिलाफ अभियान को झटका, 15 करोड़ के प्रस्ताव पर केंद्र से सिर्फ एक करोड़ की मंजूरी
punjabkesari.in Sunday, May 10, 2026 - 06:11 PM (IST)
शिमला (प्रीति): प्रदेश में नशे की बढ़ती समस्या पर रोक लगाने के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा केंद्र सरकार को भेजे गए 15 करोड़ रुपए के प्रस्ताव पर सिर्फ एक करोड़ रुपए की स्वीकृति मिलने से विभाग को बड़ा झटका लगा है। केंद्र सरकार के इस फैसले से सरकार को निराशा मिली है, क्योंकि प्रदेश में नशे के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाने की तैयारी की गई थी। जानकारी के अनुसार विभाग ने बीते वर्ष प्रदेश भर में नशा उन्मूलन को लेकर व्यापक एक्शन प्लान तैयार किया है। इसके तहत स्कूलों, कॉलेजों और पंचायत स्तर तक जागरूकता अभियान, पुनर्वास कार्यक्रम, प्रशिक्षण कार्यशालाएं और विभिन्न विभागों के सहयोग से विशेष अभियान चलाने की योजना बनाई गई है।
हालांकि बीते वर्ष भी केंद्र को इस कंपोनैंट के तहत कोई बजट नहीं मिला था। इस बार विभाग ने उक्त कंपोनैंट के तहत केंद्र सरकार को 15 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा था। विभाग को उम्मीद थी कि केंद्र प्रदेश को इसमें पर्याप्त बजट देगा, लेकिन इस बार भी विभाग को निराशा ही मिली है। हालांकि केंद्र से केवल एक करोड़ रुपए की मंजूरी मिलने के बाद अब विभाग को अपने कई प्रस्तावित कार्यक्रम सीमित संसाधनों में चलाने पड़ सकते हैं। गौरतलब है कि प्रदेश सरकार नशे को खत्म करने के लिए गंभीरता से काम कर रही है और इसके लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता की जरूरत है।
विभाग द्वारा विभिन्न जिलों में मास्टर ट्रेनरों को प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि वे फील्ड स्तर पर लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक कर सकें। विभाग का मानना है कि नशे की समस्या से निपटने के लिए केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि लगातार जनजागरूकता अभियान चलाना भी बेहद जरूरी है। विभाग अब सीमित बजट में प्राथमिकता के आधार पर योजनाओं को लागू करने की रणनीति तैयार कर रहा है। इसी कड़ी में अगले महीने भी स्टेकहोल्डर्स के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम करवाया जाएगा।
इस अभियान के लिए केंद्र को दिल खोल कर करनी चाहिए मदद
मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान का कहना है कि प्रदेश सरकार राज्य में नशे को जड़ से खत्म करने के लिए बेहतर कार्य कर रही है। प्रदेश को चिट्टा व अन्य नशों से मुक्त करने के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू स्वयं इस अभियान में उतरे हैं। सभी के सहयोग से प्रदेश में यह अभियान छेड़ा गया है। ऐसे में केंद्र को प्रदेश की दिल खोल कर मदद करनी चाहिए। हिमाचल को 15 करोड़ के प्रस्ताव में से केवल 1 करोड़ देना जनता हित में सही नहीं है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए केंद्र को भरभूर योगदान देना चाहिए।

