Shimla: स्कूलों में छात्रों के मोबाइल फोन उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध, शिक्षकों के लिए भी तय नियम
punjabkesari.in Wednesday, Feb 11, 2026 - 10:23 PM (IST)
शिमला (ब्यूरो): हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों में मोबाइल फोन और अन्य निजी इलैक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग को लेकर गाइडलाइन जारी की है। शिक्षा सचिव राकेश कंवर की ओर से इसे जारी किया गया है। सरकारी स्कूलों में छात्रों द्वारा मोबाइल फोन और अन्य निजी इलैक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे। इसमें स्मार्टवॉच, फिटबिट, हैंडफोन, गैर-शैक्षणिक टैबलेट/आईपैड, म्यूजिक प्लेयर, हैंडहेल्ड गेमिंग डिवाइस जैसे निन्टेंडो स्विच आदि शामिल हैं।
स्कूल परिसर में ऐसे किसी भी उपकरण का लाना या रखना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। स्कूल प्रबंधन समितियों की बैठकों में अभिभावकों को स्पष्ट रूप से बताया जाएगा कि छात्र मोबाइल फोन या कोई भी निजी इलैक्ट्रॉनिक डिवाइस स्कूल नहीं ला सकते। यदि कोई छात्र मोबाइल या अन्य उपकरणों के साथ पकड़ा जाता है, भले ही वह उपयोग न कर रहा हो तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। बार-बार नियम तोड़ने पर निष्कासन तक का प्रावधान रहेगा। इसमें स्कूल प्रशासन स्कूल प्रबंधन समिति के साथ परामर्श कर जुर्माने का प्रावधान भी कर सकता है।
शिक्षक कक्षा, प्रयोगशाला, परीक्षा या छात्रों के साथ किसी भी शैक्षणिक गतिविधि के दौरान मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करेंगे, सिवाय शैक्षणिक या आपात स्थिति के। मोबाइल का उपयोग केवल डिजिटल कंटैंट, उपस्थिति, लर्निंग एप्स या आधिकारिक स्कूल कार्य के लिए ही किया जा सकेगा। स्कूल समय में मोबाइल साइलेंट मोड पर रखना अनिवार्य होगा।
विशेष परिस्थितियों में ही छूट
सुरक्षा या गंभीर स्वास्थ्य कारणों से, अभिभावक की लिखित अनुमति पर ही किसी छात्र को मोबाइल लाने की अनुमति दी जा सकेगी। ऐसे मामलों में भी छात्र को फोन स्कूल के निर्धारित स्थान पर जमा करना होगा और केवल ब्रेक के दौरान वहीं से कॉल करने की अनुमति होगी।
सोशल मीडिया और रिकॉर्डिंग पर रोक
शिक्षकों द्वारा सोशल मीडिया, गेमिंग, मनोरंजन या गैर-शैक्षणिक वीडियो/ऑडियो का उपयोग बिना अनुमति वर्जित रहेगा। छात्रों की फोटो या वीडियो रिकॉर्डिंग बिना प्रिंसीपल/ स्कूल प्रबंधन समिति की अनुमति के नहीं की जा सकेगी। किसी भी शिक्षक द्वारा नियमों का उल्लंघन करने पर सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। नियमों के पालन की जिम्मेदारी स्कूल के प्रधानाचार्य/मुख्य शिक्षक की होगी। लापरवाही पाए जाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

