Shimla: डाक कर्मचारी पर 22 लाख से अधिक की हेराफेरी के आरोप, CBI ने दर्ज किए 3 केस
punjabkesari.in Monday, Jun 15, 2026 - 10:09 PM (IST)
शिमला (राक्टा): चम्बा जिले में डाक जीवन बीमा (पीएलआई) और ग्रामीण डाक जीवन बीमा (आरपीएलआई) की प्रीमियम राशि में कथित हेराफेरी के 3 अलग-अलग मामले सामने आए हैं। आरोप है कि एक डाक कर्मचारी ने ग्राहकों से नकद राशि लेने के बाद उसे पॉलिसियों में तो जमा दिखाया, लेकिन सरकारी खातों में उसका पूरा लेखा-जोखा दर्ज नहीं किया। ऐसे में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने चंबा डाक मंडल में तैनात रहे एक डाक कर्मचारी के खिलाफ सरकारी धन के कथित गबन और भ्रष्टाचार के आरोपों में 3 अलग-अलग नियमित मामले दर्ज किए हैं। आरोप है कि डाक कर्मी ने विभिन्न उप डाकघरों में तैनाती के दौरान ग्राहकों से बीमा प्रीमियम और ऋण अदायगी के रूप में प्राप्त लाखों रुपए की राशि को जमा न करवा गबन कर दिया। सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर के अनुसार जांच दायरे में आया डाक कर्मी राजीव कुमार वर्तमान में चम्बा हैड ऑफिस में पोस्टल असिस्टैंट के पद पर कार्यरत हैं। दर्ज तीनों मामलों के तहत अब तक 22.33 लाख रुपए से अधिक की कथित हेराफेरी होने के तथ्य सामने आए हैं।
हालांकि जांच एजैंसी का मानना है कि यह राशि आगे और बढ़ सकती है। मामले की जांच चम्बा डिवीजन के डाक अधीक्षक राजीव गुरूंग द्वारा की गई शिकायत पर शुरू हुई। संबंधित शिकायत जिला पुलिस अधीक्षक चम्बा के माध्यम से सीबीआई एंटी करप्शन ब्रांच शिमला को भेजी गई थी। सबसे बड़ा मामला भलेई उप डाकघर से जुड़ा है, जहां राजीव कुमार 21 अप्रैल 2022 से 18 सितम्बर 2023 तक सब पोस्ट मास्टर के पद पर तैनात रहा। आरोप है कि इस अवधि के दौरान उसने ग्राहकों से पोस्टल लाइफ इंश्योरैंस और ग्रामीण डाक जीवन बीमा की प्रीमियम राशि तथा ऋण अदायगी की रकम नकद प्राप्त की। संबंधित भुगतान को मैककैमिश सॉफ्टवेयर में दर्ज कर दिया ताकि ग्राहकों की पॉलिसियां नियमित दिखाई दें, लेकिन सरकारी लेखा प्रणाली एसएपी और मेघदूत में वही राशि जमा नहीं की गई या कम दिखाई गई।
इस हेराफेरी के माध्यम से 17,94,867 रुपए की राशि के गबन का आरोप लगाया गया है। सीबीआई ने इस संबंध में जांच उप पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र कुमार को सौंपी है। इसके साथ ही भलेई से पहले राजीव कुमार की तैनाती सुल्तानपुर उप डाकघर में थी। जांच दायरे में आए कर्मी ने यहां भी 15 नवम्बर 2018 से 20 अप्रैल 2022 तक कार्यकाल के दौरान भी इसी प्रकार की वित्तीय अनियमितताएं की गईं। जांच में मार्च 2019 से सितम्बर 2021 के बीच 1,06,291 रुपए की कथित हेराफेरी के तथ्य सामने आए हैं। इस मामले में सीबीआई ने जांच इंस्पैक्टर गोपाल सिंह को सौंपी है। सूचना के अनुसार विभाग ने जांच दायरे में आए कर्मचारी से पैनल ब्याज सहित गबन की गई राशि की भी वसूली भी कर ली है।
सब पोस्ट मास्टर के पद पर कार्यरत रहा
सीबीआई की जांच में सबसे पुराने आरोप सलूणी उप डाकघर से जुड़े हैं। यहां भी जांच दायरे में आया कर्मी 2 अप्रैल 2014 से 6 नवम्बर 2018 तक सब पोस्ट मास्टर के पद पर कार्यरत रहा। आरोप है कि अगस्त 2018 से नवम्बर 2018 के बीच ग्राहकों द्वारा जमा करवाई गई बीमा प्रीमियम और ऋण अदायगी की रकम में गड़बड़ी की गई। इस अवधि में 3,31,965 रुपए के गबन का आरोप लगाया गया है।
क्या था तरीका
जांच में पाया गया कि तीनों मामलों में कथित तौर पर एक समान कार्यप्रणाली अपनाई गई। ग्राहक डाकघर में बीमा प्रीमियम या ऋण की राशि नकद जमा करवाते थे। राशि को बीमा प्रबंधन सॉफ्टवेयर मैककैमिश में दर्ज कर दिया जाता था। इससे ग्राहक को भुगतान जमा होने का रिकॉर्ड दिखाई देता था, लेकिन उसी राशि को सरकारी लेखा प्रणाली में दर्ज नहीं किया जाता था या कम दर्ज किया जाता था।
विभागीय जांच पहले से जारी
एफआईआर में उल्लेख किया गया है कि डाक विभाग कर्मी के खिलाफ विभागीय जांच भी कर रहा है। इसके अलावा सर्किल स्तर पर कुछ और मामलों की भी जांच की जा रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि जैसे-जैसे दस्तावेजों और खातों की पड़ताल होगी, गबन की कुल राशि में बढ़ौतरी हो सकती है।
इस मामले ने डाक विभाग की वित्तीय निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में अब सभी की नजरें सीबीआई जांच पर हैं, जो यह तय करेगी कि कथित गबन का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है और क्या इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका रही है। जांच पूरी होने के बाद एजैंसी आरोप पत्र दाखिल करने और आगे की कानूनी कार्रवाई पर फैसला करेगी।

