Shimla: मर्जी के खिलाफ राजस्थान ले जाने के मामले में नवविवाहिता को कोर्ट में पेश करने के आदेश
punjabkesari.in Wednesday, Jul 15, 2026 - 10:57 PM (IST)
शिमला (मनोहर): प्रदेश हाईकोर्ट ने कांगड़ा जिले से एक नवविवाहिता को उसकी मर्जी के खिलाफ राजस्थान ले जाने के मामले पर कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने लड़की की जान और स्वतंत्रता को खतरे में देखते हुए पुलिस और प्रशासन को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि लड़की को अगली सुनवाई पर हर हाल में कोर्ट में पेश किया जाए। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी. नेगी ने याचिकाकर्त्ता आदित्य की याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के पश्चात यह आदेश जारी किए।
याचिका के अनुसार याचिकाकर्त्ता आदित्य ने 1 फरवरी 2026 को कांगड़ा जिले के चामुंडा माता मंदिर में अपनी मर्जी से शादी की थी और इसकी सूचना लड़की के माता-पिता को भी दे दी गई थी। हालांकि लड़के की उम्र 21 वर्ष से कम होने के आधार पर लड़की के परिवार की शिकायत पर राजस्थान में एक प्राथमिकी दर्ज करवाई गई थी। 16 फरवरी, 2026 को लड़की ने बयान दर्ज करवाया था कि वह दिल्ली से अपनी मर्जी से आई है और उसने अपनी स्वतंत्र इच्छा से आदित्य के साथ विवाह किया है। इसके बाद मार्च 2026 में दोनों पक्षों के बीच एक समझौता भी हुआ था कि लड़की को परेशान नहीं किया जाएगा।
याचिकाकर्त्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि 29 जून, 2026 को राजस्थान के कोटपुतली जिला के सब-डिवीजनल मैजिस्ट्रेट कार्यालय से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 100 के तहत लड़की की बरामदगी का एक आदेश हासिल किया गया है। आरोप है कि इस आदेश की आड़ में लड़की के माता-पिता ने स्थानीय कांगड़ा पुलिस को विश्वास में लिए बिना या बिना कोई रपट दर्ज करवाए, लड़की को उसकी मर्जी के खिलाफ कांगड़ा से उठा लिया और राजस्थान ले गए।
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस रिट याचिका में राजस्थान के कोटपुतली जिला के सब-डिवीजनल मैजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को भी प्रतिवादी के रूप में शामिल करने का आदेश दिया है। अदालत ने संबंधित उत्तरदाताओं और पुलिस अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया है कि वे 23 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई में लड़की की अदालत में उपस्थिति सुनिश्चित करें।

