Shimla: प्रधानमंत्री की उपस्थिति में जल्द होगा किशाऊ एमओयू हस्ताक्षरित

punjabkesari.in Tuesday, Jul 14, 2026 - 05:41 PM (IST)

शिमला (ब्यूरो): किशाऊ बहुउद्देशीय जलविद्युत परियोजना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में सांझेदार राज्यों और भारत सरकार के मध्य शीघ्र ही समझौता ज्ञापन’ हस्ताक्षरित होने की संभावना है। 422 मैगावाट क्षमता की इस परियोजना के लिए औपचारिक एमओयू हस्ताक्षरित होने से पूर्व भारत सरकार ने एमओयू का प्रारुप साझेदार राज्यों को भेजकर इस पर सुझाव और टिप्पणियां आमंत्रित की हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू किशाऊ बहुद्देशीय परियोजना एमओयू प्रारूप की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हिमाचली अधिकारों को सुनिश्चित कर परियोजना निर्माण में आगे बढ़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि हाल ही में हुई बैठक में 422 मैगावाट किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के क्रियान्वयन पर सहमति बनी है, जिसके तहत हिमाचल प्रदेश को परियोजना में कोई वित्तीय निवेश किए बिना प्रतिवर्ष लगभग 600 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त होगा।

उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने पूर्व के समझौते के प्रारूप को अस्वीकृत किया और प्रदेश के हितों को सुरक्षित रखते हुए राज्य सरकार ने प्रस्तावित शर्तों और प्रावधानों के लिए सभी हितधारकों से स्वीकृति प्रदान करवाई। इससे राज्य के दीर्घकालिक हितों की रक्षा सुनिश्चित हुई और परियोजना के क्रियान्वयन का मार्ग भी प्रशस्त हुआ। उन्होंने कहा कि संशोधित व्यवस्था के तहत सभी सांझेदार राज्यों को बिजली और पानी में उनका वैध हिस्सा मिलेगा, जबकि हिमाचल प्रदेश को भी अपनी आवश्यकता के अनुसार जलाशय से पर्याप्त पानी उपलब्ध करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य ने यमुना बेसिन में 378 मिलियन घन मीटर जल पर अपना अधिकार सुरक्षित किया है। उन्होंने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना पर समझौते को ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि इस रणनीतिक जीत से हिमाचल प्रदेश का वैध हिस्सा और दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित हुए हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड की परियोजनाओं से हिमाचल प्रदेश को मिलने वाले 13,066 मिलियन यूनिट बिजली के लंबित बकाए को प्राप्त करने के लिए भी प्रयास तेज कर रही है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद यह मामला लगभग 15 वर्ष से लंबित है। हाल ही में किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना में हिमाचल प्रदेश के वित्तीय योगदान को लेकर वर्तमान राज्य सरकार के प्रयासों से पिछले 8 वर्षों से चला आ रहा गतिरोध समाप्त हुआ है। इससे सरकार को राज्य पर पड़ने वाले भारी वित्तीय बोझ को टालने में सफलता मिली है, जबकि पूर्व भाजपा सरकार ने इस परियोजना में राज्य की हिस्सेदारी के रूप में लगभग 800 करोड़ रुपए का योगदान देने पर सहमति व्यक्त की थी।


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Content Writer

Kuldeep

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