Shimla: सूचना प्रौद्योगिकी इस्तेमाल करने में हिमाचल बना नंबर वन राज्य : सुक्खू

punjabkesari.in Tuesday, Jan 06, 2026 - 06:05 PM (IST)

शिमला (ब्यूरो): मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि जन सेवाओं को सुलभ, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग में हिमाचल प्रदेश देश का नंबर वन राज्य बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के दूर-दराज एवं जनजातीय क्षेत्रों में अधिकांश सरकारी सेवाएं आज कम्प्यूटर माऊस की एक क्लिक पर आम नागरिकों को उपलब्ध करवाई जा रही हैं, जो सुशासन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। मुख्यमंत्री शिमला में सोसायटी फॉर प्रमोशन ऑफ आईटी एंड ई-गवर्नैंस इन हिमाचल प्रदेश की सामान्य सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विभाग द्वारा विकसित विभिन्न सूचना प्रौद्योगिकी आधारित एप्लीकेशन्स और सॉफ्टवेयर की विस्तार से समीक्षा करते हुए अधिकारियों को इन्हें और अधिक नागरिक-हितैषी, सुरक्षित एवं प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए विकसित हिम उपस्थिति एप्लीकेशन की गहन समीक्षा की तथा इसे और अधिक दक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हिम एक्सैस पोर्टल में प्रदेश सरकार के सभी कर्मचारियों का पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा तथा सभी सरकारी कर्मचारियों को एक माह के भीतर इस पोर्टल पर अपना पंजीकरण सुनिश्चित करना होगा।

उन्होंने एसेट मैपिंग एप्लीकेशन का शुभारंभ करते हुए कहा कि इस एप्लीकेशन के माध्यम से नागरिकों की संपत्ति से संबंधित संपूर्ण एवं नीवनतम विवरण उपलब्ध होगा, जिससे आधारभूत संरचना के विकास, प्रभावी नीति निर्माण और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि हिम सेवा पोर्टल में राजस्व सेवाओं की बेहतर और त्वरित आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आर्टिफिशियल इंटैलीजैंस आधारित दस्तावेज सत्यापन एवं प्रमाणीकरण प्रणाली को एकीकृत किया जा रहा है। यह प्रणाली राजस्व सेवाओं में प्रथम स्तर की जांच के रूप में कार्य करेगी, जिससे न केवल राजस्व अधिकारियों को सशक्त बनाया जा सकेगा, बल्कि नागरिकों को भी अधिक सुगम और पारदर्शी सेवाएं प्राप्त होंगी। वर्तमान में राजस्व सेवाओं से जुड़ी प्रक्रिया में बड़ी संख्या में आवेदनों का मैनुअल सत्यापन करना पड़ता है, जिससे अधिकारियों पर अत्यधिक कार्यभार बढ़ जाता है।

दस्तावेजों में मामूली त्रुटियां, जैसे धुंधली फोटो या गलत प्रारूप, आवेदन निरस्त होने का कारण बनती हैं। इसके चलते अधिकारी अपना बहुमूल्य समय केवल प्रारंभिक जांच में व्यय करते हैं और नागरिकों को भी बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। एआई आधारित यह प्रणाली दस्तावेज अपलोड के समय ही उनका स्वत: स्कैन कर लेगी और तुरंत पहचान कर लेगी कि दस्तावेज स्पष्ट हैं या नहीं, सही हैं या नहीं तथा कहीं कोई आवश्यक हस्ताक्षर या विवरण तो अनुपस्थित नहीं है। वहीं, राजस्व अधिकारियों को भी प्रशासनिक जांच की जिम्मेदारी से राहत मिलेगी और वे पात्रता तथा तथ्यों के वास्तविक सत्यापन पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटैलीजैंस) और ब्लॉकचेन तकनीक को ई-गवर्नैंस में चरणबद्ध रूप से शामिल कर रही है।

उन्होंने प्रदेश में लोकमित्र केंद्रों की संख्या बढ़ाने के निर्देश देते हुए कहा कि ये केंद्र ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में जन सेवाओं की रीढ़ हैं। मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (डीटीजी एवं नवाचार) गोकुल बुटेल ने कहा कि डेलाइट के प्रमुख सरकारी सम्मेलन आरोहण-2025 में हिमाचल प्रदेश को अपनी दूरदर्शी डिजिटल शासन पहल हिम परिवार परियोजना के लिए विशेष मान्यता प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य ने रणनीतिक रूप से डिजिटल तकनीक का उपयोग करते हुए एक भविष्य-उन्मुख, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित शासन व्यवस्था का निर्माण किया है। इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव केके पंत और श्याम भगत नेगी सहित विभिन्न विभागों के सचिव और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

Kuldeep

Related News