Shimla: चंद्रभागा-रावी-ब्यास लिंक परियोजना में हिमाचली हितों की रक्षा सुनिश्चित हो : सुक्खू
punjabkesari.in Thursday, Jun 11, 2026 - 07:38 PM (IST)
शिमला (कुलदीप): मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली नीति अयोग गवर्निंग काऊंसिल बैठक में हिमाचली अधिकारों को संरक्षण प्रदान करने की पैरवी की। उन्होंने चंद्रभागा-रावी-ब्यास लिंक परियोजना में हिमाचली हितों की रक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया। करीब 2,352 करोड़ रुपए की इस परियोजना के सिरे चढ़ने से हिमाचल प्रदेश की आत्मनिर्भरता के द्वार खुल सकते हैं। राष्ट्रीय महत्व की यह परियोजना हिमाचल प्रदेश के साथ उत्तर भारत के लिए भी वरदान साबित हो सकती है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपने संबोधन में कहा कि राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने से राज्य की अर्थव्यवस्था बहुत प्रभावित हुई है। राज्य को प्रदान किए गए 25,000 करोड़ रुपए नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं हैं और विकास गतिविधियों को सुचारू रुप से जारी रखने के लिए इस राशि को बढ़ाकर 50,000 करोड़ रुपए किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में लगभग 13,000 मैगावाट विद्युत उत्पादन होने के बावजूद राज्य को मुफ्त बिजली का उचित हिस्सा नहीं मिल रहा है। इसके अतिरिक्त भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बी.बी.एम.बी.) से राज्य को लगभग 7,000 करोड़ रुपए की बकाया राशि भी प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं का सबसे अधिक प्रभाव झेलने के बावजूद प्रदेश को केंद्र की तरफ से घोषित 1,500 करोड़ रुपए की विशेष सहायता राशि का अभी भी इंतजार है। उन्होंने कहा कि वर्तमान जी.एस.टी. व्यवस्था के कारण पिछले 8 वर्षों में राज्य को लगभग 25,000 करोड़ रुपए के राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ा है।
राजस्व हानि आकलन के लिए गठित हो उच्च स्तरीय समिति
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश के समक्ष मौजूदा वित्तीय चुनौतियों को प्रमुखता से उठाते हुए प्रधानमंत्री से राज्य के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह समिति राजस्व घाटा अनुदान की समाप्ति, प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान, जलविद्युत परियोजनाओं में मुफ्त बिजली के हिस्से में कमी तथा जीएसटी व्यवस्था से उत्पन्न राजस्व हानि का आकलन कर सके। इस आकलन के आधार पर राज्य को उसका न्यायोचित हिस्सा प्रदान किया जाए।
हिमाचल प्रदेश देश का ग्रीन फ्रंटियर
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश का ग्रीन फ्रंटियर है। उन्होंने कहा कि भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के एक अध्ययन के अनुसार हिमाचल प्रदेश देश को प्रतिवर्ष लगभग 90,000 करोड़ रुपए मूल्य की पारिस्थितिकीय सेवाएं प्रदान करता है, लेकिन इसके अनुरुप राज्य को कोई पर्याप्त आर्थिक प्रतिपूर्ति नहीं मिल रही है।
वन स्टेट-वन इंटरनेशनल डेस्टिनेशन के लिए हवाई संपर्क जरुरी
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने वन स्टेट-वन इंटरनेशनल डेस्टिनेशन के लिए हिमाचल प्रदेश में हवाई संपर्क की आवश्यकता पर बल देते हुए गग्गल हवाई अड्डे के विस्तार और विकास का मुद्दा उठाया। उन्होंने बच्चों के पोषण कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास तथा शिक्षा विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।
साथ ही आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के बीच डेटा साझाकरण को महत्त्वपूर्ण बताते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित, सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित तथा साक्ष्य-आधारित निगरानी प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार द्वारा नशे के विरुद्ध चलाए जा रहे व्यापक अभियान की भी जानकारी दी। उन्होंने खुफिया तंत्र को सुदृढ़ बनाने और विभिन्न एजैंसियों के बीच बेहतर समन्वय के लिए केंद्र सरकार से सहयोग का आग्रह किया।
समावेशी मानव विकास पर चर्चा
नीति आयोग बैठक का विषय विकसित भारत के लिए समावेशी मानव विकास था। बैठक में देशभर में समावेशी विकास सुनिश्चित करने तथा विकसित भारत के दृष्टिकोण को ठोस परिणामों में परिवर्तित करने की रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने मानव विकास सूचकांकों में प्रदेश की उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस योजना का उद्देश्य राज्य के लगभग 1.5 लाख निर्धन परिवारों की पहचान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

