Shimla: कर्ज प्रबंधन के साथ आय बढ़ाने की कार्ययोजना भी सार्वजनिक करे सरकार: त्रिलोक

punjabkesari.in Sunday, Sep 20, 2026 - 05:52 PM (IST)

शिमला (ब्यूरो): भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता त्रिलोक कपूर ने हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 से 2029-30 तक तैयार की गई मध्यम अवधि ऋण प्रबंधन रणनीति पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को कर्ज के पुनर्भुगतान की समयसीमा बढ़ाने के साथ-साथ राजस्व बढ़ाने, अनुत्पादक व्यय नियंत्रित करने और वित्तीय घाटा कम करने की ठोस कार्ययोजना भी जनता के सामने रखनी चाहिए। कपूर ने कहा कि हिमाचल सरकार ने अगले चार वर्षों में ऋण और सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का अनुपात घटाकर 40.64 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है। इसी रिपोर्ट में सितंबर 2026 तक प्रदेश पर करीब 1.10 लाख करोड़ रुपए का कर्ज होने का उल्लेख किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार यह स्पष्ट करे कि अगले चार वर्षों में राज्य की आय कितनी बढ़ने का अनुमान है, कुल बकाया कर्ज में क्या परिवर्तन होगा और ब्याज भुगतान का बोझ किस प्रकार कम किया जाएगा।

कपूर ने कहा कि ऋण-जीडीपी अनुपात में कमी और कुल बकाया कर्ज में वास्तविक कमी दो अलग-अलग बातें हैं। सरकार को दोनों के लिए अलग-अलग लक्ष्य सार्वजनिक करने चाहिए। त्रिलोक कपूर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के वर्ष 2026-27 के बजट विश्लेषण के अनुसार राज्य का राजस्व घाटा 6,577 करोड़ रुपए और राजकोषीय घाटा 9,698 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है। राजस्व घाटा जीएसडीपी का 2.4 प्रतिशत और राजकोषीय घाटा 3.5 प्रतिशत अनुमानित है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति का आकलन करते समय पूर्ववर्ती सरकारों से प्राप्त देनदारियों, वर्तमान सरकार की उधारी, ब्याज भुगतान और विकास व्यय, सभी को ध्यान में रखना आवश्यक है। कपूर ने राज्य सरकार से मांग की कि चार वर्षीय ऋण प्रबंधन रणनीति के अंतर्गत वर्षवार कुल बकाया कर्ज, ऋण-जीडीपी अनुपात, ब्याज भुगतान, मूलधन पुनर्भुगतान और राजस्व बढ़ाने के प्रस्तावित उपायों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक किया जाए।

 


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Kuldeep

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